एक आवाज़ जिसने सीमाएं मिटा दीं
सोशल मीडिया पर रोज़ सैकड़ों वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो मन, भावना और सोच—तीनों को छू जाते हैं। इन दिनों इंटरनेट पर एक ऐसी ही आवाज़ गूंज रही है, जिसने धर्म, भाषा और पहचान की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
केरल की एक किशोरी, अंशा जाकिर, जिनकी पहचान एक मुस्लिम छात्रा के रूप में है, उन्होंने जब ‘शिव तांडव स्तोत्र’ गाया—तो सुनने वाले कुछ पल के लिए ठहर गए।
आज यही वीडियो डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंच चुका है।
कौन हैं अंशा जाकिर?
अंशा जाकिर केरल के मलप्पुरम जिले के नीलांबुर इलाके की रहने वाली हैं।
वह फिलहाल नौवीं कक्षा की छात्रा हैं और पढ़ाई के साथ-साथ संगीत को पूरे मन से जीती हैं।
- बचपन से संगीत में रुचि
- सोशल मीडिया पर पहले से मौजूदगी
- ओरिजिनल म्यूजिक और मैशअप्स के लिए पहचान
लेकिन जिस तरह से उन्होंने संस्कृत के सबसे कठिन स्तोत्रों में से एक को गाया, उसने उन्हें रातों-रात देश-दुनिया में चर्चा का विषय बना दिया।
‘शिव तांडव स्तोत्र’ — आसान नहीं, साधना है
‘शिव तांडव स्तोत्र’ सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि:
- उच्चारण की कठिनता
- तेज़ लय
- गहरी भावनात्मक ऊर्जा
- शुद्ध संस्कृत शब्दावली
इन सभी कारणों से यह स्तोत्र गाने वालों के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसकी रचना लंकेश रावण ने की थी।
यह भगवान शिव के तांडव नृत्य, शक्ति और चेतना का प्रतीक है।
अंशा ने इसे जिस स्पष्टता, ताल और श्रद्धा के साथ प्रस्तुत किया—वह अनुभवी कलाकारों के लिए भी प्रेरणादायक है।
वीडियो कैसे हुआ वायरल?
अंशा ने यह वीडियो नवंबर 2024 में इंस्टाग्राम पर साझा किया था।
हालांकि वीडियो नया नहीं है, लेकिन:
- आज भी ट्रेंडिंग में है
- बार-बार शेयर किया जा रहा है
- रील्स, स्टोरी और शॉर्ट्स में फैल चुका है
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अब तक:
- 1.5 करोड़+ व्यूज
- 16 लाख+ लाइक्स
- हजारों भावनात्मक कमेंट्स
यह साबित करता है कि सच्ची कला समय की मोहताज नहीं होती।
लोगों की प्रतिक्रियाएं: “रोंगटे खड़े हो गए”
कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।
लोग सिर्फ आवाज़ की तारीफ नहीं कर रहे, बल्कि उस भावना की भी सराहना कर रहे हैं जो इस प्रस्तुति से झलकती है।
कुछ प्रतिक्रियाएं:
- “आवाज़ सुनकर आंखें भर आईं”
- “यही है असली भारत”
- “भक्ति की कोई मज़हब सीमा नहीं होती”
- “शब्द नहीं हैं, सिर्फ सुकून है”
कई यूजर्स ने इसे गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीवंत मिसाल बताया।
कला, आस्था और इंसानियत का संगम
इस वीडियो की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह किसी विवाद, तुलना या टकराव को जन्म नहीं देता।
बल्कि यह दिखाता है कि:
- संगीत सबका होता है
- भक्ति की भाषा सार्वभौमिक है
- कला दिल से निकलती है, पहचान से नहीं
अंशा की प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि संस्कृति को अपनाने के लिए किसी लेबल की जरूरत नहीं होती।
अंशा का सपना क्या है?
अंशा का सपना है कि वह एक सफल और पहचान बनाने वाली गायिका बनें।
वह अपनी इस लोकप्रियता का श्रेय:
- ईश्वर की कृपा
- परिवार के समर्थन
- और श्रोताओं के प्यार
को देती हैं।
इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी पहचान मिलना, उनके सफर की सिर्फ शुरुआत मानी जा रही है।
क्यों खास है यह वीडियो?
इस वीडियो की खास बातें:
| पहलू | कारण |
|---|---|
| गायन | शुद्ध उच्चारण और कठिन रचना |
| संदेश | सांस्कृतिक सौहार्द |
| कलाकार | कम उम्र में बड़ी साधना |
| प्रतिक्रिया | हर वर्ग से सराहना |
क्या सिखाता है यह वायरल वीडियो?
आज जब सोशल मीडिया अक्सर विवाद और नकारात्मकता से भरा रहता है, ऐसे वीडियो हमें याद दिलाते हैं कि:
कला जोड़ती है, तोड़ती नहीं।
अंशा जाकिर की यह प्रस्तुति सिर्फ एक वायरल क्लिप नहीं, बल्कि सोच बदलने वाली अनुभूति है।
निष्कर्ष
मलप्पुरम की एक साधारण-सी छात्रा की असाधारण आवाज़ ने यह दिखा दिया कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।
‘शिव तांडव स्तोत्र’ की यह प्रस्तुति आने वाले समय में भी याद रखी जाएगी—एक ऐसे उदाहरण के रूप में, जहां श्रद्धा और संगीत ने दिलों को जोड़ दिया।
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