Supreme Court hearing on Rajasthan liquor shops : राजस्थान में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित 1102 शराब की दुकानों को हटाने के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. इस फैसले से राज्य सरकार और शराब लाइसेंस धारकों को बड़ी राहत मिली है.
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने नवंबर 2025 में आदेश दिया था कि नगर निगम और शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों के भीतर हाईवे से 500 मीटर के दायरे में आने वाली शराब दुकानों को स्थानांतरित किया जाए. इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार और दुकानदारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश के संचालन पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए दिशा-निर्देशों से मेल नहीं खाता.
राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही नगर निगम क्षेत्रों में शराब दुकानों को लेकर कुछ शर्तों में छूट दे चुका है, जिसे हाईकोर्ट ने नजरअंदाज किया.
हाईकोर्ट का क्या था आदेश?
राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि:
- राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी के भीतर स्थित सभी शराब दुकानों को हटाया जाए
- भले ही वे नगर निगम या शहरी सीमा के अंदर ही क्यों न आती हों
- सार्वजनिक सुरक्षा को राजस्व से ऊपर रखते हुए सख्त कार्रवाई की जाए
सुप्रीम कोर्ट में किसने रखे तर्क?
राज्य सरकार के साथ-साथ शराब लाइसेंस धारकों की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और नवीन पहवा ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही 2017 और 2018 के आदेशों में इन नियमों को शहरी क्षेत्रों में लचीला किया था.
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या को पलट नहीं सकता.
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम अंतरिम फैसला
सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिससे फिलहाल राज्य में हाईवे किनारे स्थित 1102 शराब दुकानें बंद या स्थानांतरित नहीं होंगी. मामले की अगली सुनवाई जल्द होगी.