Rajasthan : एंटीबायोटिक पर बड़ा खुलासा: SMS अस्पताल की रिपोर्ट से जयपुर से दिल्ली तक अलर्ट!!

Hemant Singh
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Rajasthan / जयपुर। वर्षों से बीमारियों के इलाज में कारगर मानी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अलग-अलग बीमारियों में इस्तेमाल की जा रही एंटीबायोटिक दवाएं 57 फीसदी से 90 फीसदी तक बेअसर हो चुकी हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और इसे नई दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) को भेजा गया है।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बन रही बड़ी चुनौती

रिसर्च के मुताबिक, एंटीबायोटिक दवाओं का जरूरत से ज्यादा और बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल मरीजों के शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पैदा कर रहा है। इसका नतीजा यह है कि अब सामान्य खांसी, जुकाम, एलर्जी और हल्के संक्रमण भी लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहे। कई मरीजों में दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में खुजली, यूरिन इंफेक्शन और एलर्जी जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

दो साल का अध्ययन, करीब 10 हजार मरीज शामिल

SMS मेडिकल कॉलेज की मेडिकल टीम ने राजस्थान के पांच बड़े अस्पतालों में दो साल तक 9,776 मरीजों पर यह अध्ययन किया। रिपोर्ट में सामने आया कि मरीजों के सैंपल में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति 60 से 98 फीसदी तक रेजिस्टेंस पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक लेने से भविष्य में गंभीर संक्रमणों का इलाज मुश्किल हो सकता है।

मरीजों की आपबीती ने बढ़ाई चिंता

SMS अस्पताल में इलाज कराने पहुंचीं निर्मला देवी का कहना है कि पहले दो-तीन दिन में खांसी ठीक हो जाती थी, लेकिन अब कई एंटीबायोटिक लेने के बाद भी राहत नहीं मिलती। वहीं, बुजुर्ग मरीज सैफुद्दीन बताते हैं कि कोरोना काल के बाद जुकाम और दमे की समस्या पहले से ज्यादा गंभीर हो गई है और दवाएं असर नहीं कर रहीं।

डॉक्टरों की चेतावनी

रिसर्च की अगुवाई करने वाली माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. रजनी शर्मा का कहना है कि बच्चों और बड़ों में वायरल व एलर्जी की बीमारियों में एंटीबायोटिक देने से रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, SMS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने डॉक्टरों को सलाह दी है कि सामान्य बीमारियों में एंटीबायोटिक का उपयोग बेहद सीमित किया जाए।

वैश्विक स्तर पर भी गंभीर खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 12.9 लाख से अधिक मौतें एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण हो चुकी हैं। भारत जैसे देशों में यह खतरा और भी तेजी से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं न लें। यह रिपोर्ट यह नहीं कहती कि सभी एंटीबायोटिक बेकार हो चुकी हैं, लेकिन जिन मरीजों में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया विकसित हो चुका है, उनके लिए खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

निष्कर्ष: एंटीबायोटिक का गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न सिर्फ आज की बीमारी को जटिल बना रहा है, बल्कि भविष्य के इलाज को भी खतरे में डाल रहा है। अब समय आ गया है कि मरीज और डॉक्टर दोनों मिलकर जिम्मेदारी से दवाओं का उपयोग करें।

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