Rajasthan Police Big Action : राजस्थान जब गणतंत्र दिवस 2026 की तैयारियों में जुटा था, उसी वक्त नागौर से सामने आई एक ऐसी खबर जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। जिले के हरसौर क्षेत्र में स्थित एक सुनसान फार्म हाउस से 10,000 किलो अमोनियम नाइट्रेट, भारी मात्रा में डेटोनेटर और डेटोनेटिंग वायर बरामद हुए — इतनी विस्फोटक सामग्री कि उससे पूरा शहर तबाह किया जा सकता था।
- कैसे हुआ सबसे बड़ा विस्फोटक भंडाफोड़?
- 45 बीघा जमीन पर बना फार्म हाउस, अंदर चलता था विस्फोटक का खेल
- कौन है सुलेमान खान? — 12 साल पुराना विस्फोटक नेटवर्क
- सुलेमान खान का आपराधिक रिकॉर्ड — केस टाइमलाइन (तालिका)
- अवैध खनन तक पहुंचा विस्फोटक नेटवर्क
- एनआईए की एंट्री, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में
- हिरासत में बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती
- किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
- कितना खतरनाक था यह भंडारण?
- पुलिस अधीक्षक ने क्या कहा?
- राजस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठे सवाल?
- क्या यह सिर्फ अवैध खनन तक सीमित मामला है?
- आम जनता के लिए क्या संदेश?
- निष्कर्ष: एक फार्म हाउस नहीं, पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी
इस सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार आरोपी सुलेमान खान को लेकर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे उसकी आपराधिक दुनिया की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के अनुसार, यह कोई पहली बार नहीं है जब उसका नाम विस्फोटक मामलों में सामने आया हो — बल्कि वह पिछले 12 वर्षों से इस अवैध कारोबार का पुराना खिलाड़ी रहा है।
merarajasthannews की यह रिपोर्ट पूरी तरह प्रमाणिक, सत्यापित और आधिकारिक सूत्रों पर आधारित है। इसमें कोई अफवाह, अंदाजा या सनसनीखेज कल्पना शामिल नहीं की गई है।
कैसे हुआ सबसे बड़ा विस्फोटक भंडाफोड़?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिले को ह्यूमन इंटेलिजेंस और टेक्निकल सर्विलांस के जरिए इनपुट मिला था कि नागौर क्षेत्र में बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री की अवैध खरीद-बिक्री और भंडारण किया जा रहा है। इसके बाद जिला पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से जांच शुरू की और हरसौर गांव के बाहरी इलाके में बने एक फार्म हाउस पर छापा मारा।
छापे के दौरान पुलिस टीम खुद भी दंग रह गई जब वहां:
- 10,000 किलो अमोनियम नाइट्रेट
- बड़ी संख्या में डेटोनेटर
- डेटोनेटिंग वायर
- अन्य विस्फोटक उपकरण
बरामद हुए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक की राजस्थान में विस्फोटक अधिनियम के तहत सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
45 बीघा जमीन पर बना फार्म हाउस, अंदर चलता था विस्फोटक का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी सुलेमान खान ने हरसौर गांव के आखिरी छोर पर करीब 45 बीघा जमीन में अपना फार्म हाउस बना रखा था। यह इलाका इतना सुनसान था कि आसपास से गुजरने वाले लोगों को भी अंदर झांकने की जरूरत महसूस नहीं होती थी।
फार्म हाउस की:
- ऊंची दीवारें
- सीमित आवाजाही
- बाहर से खेती-बाड़ी जैसा माहौल
देखकर किसी को शक तक नहीं होता था कि अंदर भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का भंडारण किया जा रहा है। कार्रवाई के बाद ही सच्चाई सामने आई कि फार्म हाउस के कमरों में बिना किसी सुरक्षा मानक के विस्फोटक रखा गया था, जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता था।
कौन है सुलेमान खान? — 12 साल पुराना विस्फोटक नेटवर्क
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने सुलेमान खान की आपराधिक पृष्ठभूमि खंगाली तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार:
- वह लंबे समय से विस्फोटक खरीदने, बेचने और भंडारण करने के अवैध कारोबार में सक्रिय रहा है।
- इस धंधे से उसने करोड़ों रुपये की संपत्ति खड़ी कर ली थी।
- उसने अपना नेटवर्क इस तरह से तैयार किया था कि वर्षों तक किसी एजेंसी को भनक तक नहीं लगी।
सुलेमान खान का आपराधिक रिकॉर्ड — केस टाइमलाइन (तालिका)
| वर्ष | मामला | स्थिति |
|---|---|---|
| 2014 | विस्फोटक अधिनियम के तहत केस | ट्रायल जारी |
| 2017 | विस्फोटक अधिनियम मामला | बरी |
| 2020 | विस्फोटक अधिनियम मामला | ट्रायल जारी |
| 2026 | 10,000 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद | जांच जारी |
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इनमें से दो मामले अभी भी अदालत में विचाराधीन हैं, जबकि एक में उसे पहले ही बरी किया जा चुका है।
अवैध खनन तक पहुंचा विस्फोटक नेटवर्क
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सुलेमान खान:
- अलग-अलग स्रोतों से विस्फोटक सामग्री मंगवाता था
- उसे फार्म हाउस में स्टोर करता था
- फिर वहां से अवैध खनन (Illegal Mining) करने वालों तक सप्लाई करता था
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि:
- किन-किन इलाकों में इसका नेटवर्क फैला हुआ था
- अवैध माइंस से जुड़े कौन-कौन लोग इसके ग्राहक थे
- क्या इसमें कोई संगठित गिरोह शामिल था
इस पूरे नेटवर्क की जांच में अब केंद्रीय जांच एजेंसियां भी जुट गई हैं।
एनआईए की एंट्री, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की टीम भी नागौर के हरसौर क्षेत्र पहुंच चुकी है। केंद्रीय एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि:
- विस्फोटक कहां से लाया गया
- किस रास्ते से इसकी सप्लाई होती थी
- कहीं इसका इस्तेमाल किसी बड़ी साजिश के लिए तो नहीं होना था
फिलहाल इस संबंध में किसी आतंकी लिंक की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
हिरासत में बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में भर्ती
पुलिस हिरासत में रहते हुए आरोपी सुलेमान खान की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल परीक्षण के बाद उसे दोबारा जांच एजेंसियों की कस्टडी में लिया जाएगा।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने सुलेमान खान के खिलाफ:
- विस्फोटक अधिनियम
- संगठित अपराध (Organised Crime)
- अवैध भंडारण और सप्लाई
जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि कोई और गंभीर तथ्य सामने आते हैं, तो धाराएं और बढ़ाई जा सकती हैं।
कितना खतरनाक था यह भंडारण?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमोनियम नाइट्रेट एक ऐसा रसायन है जो:
- औद्योगिक कार्यों में नियंत्रित मात्रा में उपयोग होता है
- लेकिन गलत तरीके से स्टोर होने पर
- आग, झटके या गर्मी के संपर्क में आने से
- भीषण विस्फोट का कारण बन सकता है
जिस फार्म हाउस में यह सामग्री रखी गई थी, वहां:
- फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं
- तापमान नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं
- सुरक्षा मानकों का पूरी तरह अभाव
था, जिससे आसपास के गांवों और आबादी के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया था।
पुलिस अधीक्षक ने क्या कहा?
नागौर जिला पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छवा ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि:
“इंटेलिजेंस इनपुट मिलने के बाद जिला पुलिस ने ह्यूमन और टेक्निकल इंटेलिजेंस के आधार पर कार्रवाई की। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और विस्फोटक अधिनियम व संगठित अपराध की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। यह राजस्थान की अब तक की सबसे बड़ी विस्फोटक बरामदगी है।”
राजस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर क्यों उठे सवाल?
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- इतने बड़े स्तर पर विस्फोटक भंडारण वर्षों तक कैसे चलता रहा?
- स्थानीय स्तर पर किसी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
- क्या अवैध खनन नेटवर्क इससे पहले भी ऐसे विस्फोटकों का उपयोग करता रहा है?
- सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी प्रणाली में कहां चूक हुई?
हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
क्या यह सिर्फ अवैध खनन तक सीमित मामला है?
फिलहाल जांच एजेंसियां इस केस को:
- अवैध विस्फोटक भंडारण
- अवैध खनन सप्लाई नेटवर्क
के एंगल से देख रही हैं। किसी भी आतंकी या राष्ट्रविरोधी गतिविधि से जुड़े लिंक की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
आम जनता के लिए क्या संदेश?
पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि:
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें
- विस्फोटक या खतरनाक सामग्री से जुड़े किसी भी व्यापार की जानकारी छुपाएं नहीं
- ग्रामीण क्षेत्रों में अज्ञात गोदामों या फार्म हाउस जैसी जगहों पर गतिविधियों पर नजर रखें
निष्कर्ष: एक फार्म हाउस नहीं, पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी
नागौर के हरसौर इलाके में पकड़ा गया यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि राजस्थान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। 45 बीघा जमीन पर बना शांत दिखने वाला फार्म हाउस असल में पूरे शहर के लिए एक चलता-फिरता बारूदखाना बन चुका था।
अब सवाल यह नहीं कि विस्फोटक बरामद हुआ, बल्कि यह है कि इतने साल तक यह कारोबार बिना किसी रुकावट के कैसे चलता रहा? जांच एजेंसियों के सामने अब सिर्फ आरोपी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की चुनौती है।
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