Rajasthan PNB Bank gold Fraud : राजस्थान में बैंक घोटाले का पर्दाफाश : PNB नवलगढ़ ब्रांच में बड़ा घोटाला – गोल्ड लोन के बदले करोड़ों की धोखाधड़ी बैंक में जमा साढ़े छह करोड़ का सोना निकला नकली! — 73 पैकेट नकली, 3 से असली सोना गायब! -जांच तेज…

Hemant Singh
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Rajasthan PNB Bank gold Fraud : राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ कस्बे में स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है. गोल्ड लोन के बदले बैंक में जमा कराया गया करीब साढ़े छह करोड़ रुपये मूल्य का सोना जांच में नकली पाया गया है. इस मामले ने न केवल बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि गोल्ड लोन जैसी भरोसेमंद मानी जाने वाली प्रक्रिया की विश्वसनीयता को भी झटका दिया है.

बैंक प्रबंधन के अनुसार, यह मामला उस समय उजागर हुआ जब शाखा स्तर पर नियमित ऑडिट और आंतरिक सत्यापन के दौरान लॉकर में रखे गए सोने की गुणवत्ता और वजन की दोबारा जांच करवाई गई. जांच के नतीजे सामने आते ही पूरे बैंक परिसर में हड़कंप मच गया.

76 पैकेट्स में रखा था सोना, 73 पूरी तरह नकली निकले

बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक, गोल्ड लोन के एवज में करीब चार किलो सोना शाखा के सुरक्षित लॉकर में रखा गया था. यह सोना कुल 76 पैकेट्स में सीलबंद हालत में सुरक्षित किया गया था. लेकिन जब पैकेट्स की जांच हुई, तो 76 में से 73 पैकेट्स में रखा गया सोना पूरी तरह नकली पाया गया.

इसके अलावा शेष तीन पैकेट्स के साथ छेड़छाड़ किए जाने के संकेत भी मिले हैं. आशंका जताई जा रही है कि इन पैकेट्स से असली सोना निकालकर उसकी जगह नकली सामग्री रख दी गई थी. इस तरह कुल मिलाकर करीब साढ़े छह करोड़ रुपये मूल्य का सोना बैंक से गायब होने की बात सामने आई है.

गोल्ड लोन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

PNB नवलगढ़ शाखा में यह गोल्ड लोन अलग-अलग खाताधारकों को जारी किया गया था. बैंक नियमों के तहत, सोने की शुद्धता की जांच, वजन का सत्यापन और पैकेट्स की सीलिंग के बाद उसे सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है. बावजूद इसके इतनी बड़ी मात्रा में नकली सोना बैंक तक कैसे पहुंचा और लंबे समय तक इसकी पहचान क्यों नहीं हो सकी, यह अब जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल शाखा स्तर की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है.

किन अधिकारियों और कर्मचारियों पर दर्ज हुआ मामला

इस मामले में शाखा प्रबंधक अमित कुमार (निवासी सीथल), बैंक कर्मचारी अनंतप्रकाश चौधरी और संतोष सैनी को आरोपी बनाया गया है. तीनों के खिलाफ नवलगढ़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है. यह शिकायत पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक मुकेश सिहाग की ओर से दर्ज करवाई गई है.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गोल्ड लोन के नाम पर जानबूझकर धोखाधड़ी की गई और बैंक को करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया.

सीसीटीवी फुटेज में सामने आई संदिग्ध गतिविधियां

बैंक प्रबंधन की ओर से की गई आंतरिक जांच के दौरान शाखा के सीसीटीवी कैमरों की भी बारीकी से जांच की गई. फुटेज में पिछले महीने 21 और 22 जनवरी को आरोपितों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं. इन दिनों गोल्ड लॉकर और उससे जुड़े दस्तावेजों के आसपास असामान्य हलचल देखी गई, जिससे जांच एजेंसियों का शक और गहरा हो गया.

इन्हीं फुटेज के आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई है और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया गया है.

बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था जांच के घेरे में

इस घटना के सामने आने के बाद बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था और गोल्ड लोन प्रोसेस की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लॉकर जैसी उच्च सुरक्षा वाली जगह पर भी नकली सोना वर्षों तक जमा रह सकता है, तो यह पूरी प्रणाली के लिए चेतावनी संकेत है.

अब यह जांच की जा रही है कि क्या यह मामला केवल एक शाखा तक सीमित है या कहीं और भी इसी तरह की गड़बड़ियां हुई हैं.

पुलिस और बैंक की संयुक्त जांच जारी

फिलहाल पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है. बैंक प्रबंधन ने सभी संबंधित दस्तावेज, लॉकर रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और लोन फाइलें जांच एजेंसियों को सौंप दी हैं. साथ ही, फॉरेंसिक जांच के जरिए नकली सोने की सामग्री और उसकी आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है.

अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच के आधार पर यह एक संगठित धोखाधड़ी का मामला प्रतीत हो रहा है और आने वाले दिनों में इसमें और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है.

निष्कर्ष : Rajasthan PNB Bank gold Fraud

PNB नवलगढ़ शाखा में सामने आया यह मामला न केवल बैंकिंग जगत के लिए चेतावनी है, बल्कि आम ग्राहकों के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाता है. गोल्ड लोन जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली व्यवस्था में यदि इस स्तर की हेराफेरी संभव है, तो इससे पूरी प्रणाली की निगरानी और ऑडिट प्रक्रिया को मजबूत करने की जरूरत स्पष्ट हो जाती है.

जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें कौन-कौन शामिल हैं.

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