Rajasthan Disturbed Areas Act 2026: राजस्थान में अब घर बेचना होगा मुश्किल? ऐसा सच जो सरकार नहीं बता रही! ,प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री पर लगेगा ब्रेक? आपके मन में उठ रहे 8 बड़े सवालों के जवाब यहां पढ़ें…

Hemant Singh
16 Min Read

Rajasthan Disturbed Areas Act 2026 : राजस्थान में प्रॉपर्टी कानून को लेकर बड़ा बदलाव आने वाला है। सरकार ने राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट 2026 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे विधानसभा में पेश करने की तैयारी है। इस कानून को लेकर सोशल मीडिया से लेकर आम जनता तक के बीच कई सवाल घूम रहे हैं — क्या अब घर खरीदना मुश्किल होगा? क्या सरकार धर्म के आधार पर प्रॉपर्टी सौदों पर रोक लगाएगी? क्या इससे पलायन रुकेगा या विवाद बढ़ेगा?

Contents

इन तमाम सवालों के जवाब जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह कानून सिर्फ रियल एस्टेट नहीं बल्कि सामाजिक संतुलन, कानून व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से भी जुड़ा है।

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इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में हम विस्तार से समझेंगे:

  • डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट क्या होता है?
  • राजस्थान सरकार यह कानून क्यों ला रही है?
  • इसका आम नागरिक पर क्या असर पड़ेगा?
  • क्या यह कानून किसी खास समुदाय को निशाना बनाता है?
  • गुजरात मॉडल से राजस्थान क्या सीख रहा है?
  • अगर कानून टूटा तो सजा क्या होगी?
  • क्या इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
  • इससे प्रॉपर्टी बाजार और निवेश पर क्या असर पड़ेगा?

राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट 2026 आखिर है क्या?

राजस्थान सरकार जिस कानून को लाने जा रही है, उसका उद्देश्य उन इलाकों में अचल संपत्ति (घर, दुकान, जमीन) की खरीद-बिक्री को नियंत्रित करना है, जहां:

  • बार-बार साम्प्रदायिक तनाव हुआ हो
  • किसी एक समुदाय का पलायन हुआ हो
  • आबादी का संतुलन अचानक बिगड़ा हो
  • कानून-व्यवस्था की स्थिति संवेदनशील रही हो

सरकार का कहना है कि यह कानून लोगों को डर, दबाव या मजबूरी में घर बेचने से बचाने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए लाया जा रहा है।

ड्राफ्ट के मुताबिक, अगर किसी इलाके को जिला कलेक्टर “डिस्टर्ब्ड एरिया” घोषित करता है, तो वहां:

  • बिना प्रशासनिक अनुमति के प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री नहीं हो सकेगी
  • खासतौर पर अलग-अलग समुदायों के बीच लेन-देन पर विशेष निगरानी रहेगी
  • हर सौदे से पहले जिला प्रशासन की जांच और मंजूरी जरूरी होगी

सरकार को यह कानून लाने की जरूरत क्यों पड़ी?

पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान के कई शहरों — जैसे जयपुर, अजमेर, जोधपुर, भीलवाड़ा, अलवर, भरतपुर आदि — में ऐसे इलाके सामने आए हैं जहां:

  • सांप्रदायिक तनाव के बाद एक समुदाय के लोग घर बेचकर पलायन कर गए
  • डर या सामाजिक दबाव के चलते लोगों ने मजबूरी में अपनी संपत्ति छोड़ी
  • कुछ इलाकों में आबादी का संतुलन अचानक बदल गया

सरकार का दावा है कि इस कानून से:

  • जबरन या डर के कारण होने वाली प्रॉपर्टी डील रुकेगी
  • दंगे या तनाव के बाद होने वाला पलायन रोका जा सकेगा
  • शांति और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी

कैबिनेट बैठक में क्या फैसला हुआ?

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस कानून के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई है। इसे विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा।

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित कानून का नाम होगा:

“राजस्थान अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध एवं किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण विधेयक, 2026”

यह कानून पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी से लागू होगा।

Table 1: प्रस्तावित राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट — मुख्य बिंदु

बिंदु विवरण
कानून का नाम राजस्थान अशांत क्षेत्र संपत्ति नियंत्रण अधिनियम, 2026
लागू क्षेत्र जिला कलेक्टर द्वारा घोषित डिस्टर्ब्ड एरिया
नियंत्रण अलग-अलग समुदायों के बीच संपत्ति लेन-देन पर
अनुमति जिला कलेक्टर से पूर्व स्वीकृति जरूरी
उल्लंघन पर सजा अधिकतम 5 साल जेल + सौदा रद्द
उद्देश्य पलायन रोकना, सामाजिक संतुलन बनाए रखना
अपील का अधिकार हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है
मॉडल गुजरात डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट

अब आते हैं उन 8 सवालों पर, जो हर किसी के मन में घूम रहे हैं

1. डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट क्या होता है और इसका असली मकसद क्या है?

डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट ऐसा कानून होता है, जिसके तहत सरकार संवेदनशील इलाकों में प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री को नियंत्रित करती है ताकि:

  • किसी समुदाय का जबरन पलायन न हो
  • डर या दबाव में सौदे न हों
  • दंगों के बाद आबादी का संतुलन न बिगड़े
  • सामाजिक सौहार्द बना रहे

राजस्थान सरकार का दावा है कि यह कानून धर्म आधारित नहीं, बल्कि सुरक्षा और शांति आधारित है।

2. क्या जिला कलेक्टर किसी इलाके को डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित कर सकते हैं?

हां। प्रस्तावित कानून के तहत:

  • जिला कलेक्टर किसी मोहल्ले, कॉलोनी, वार्ड या इलाके को
  • साम्प्रदायिक तनाव, दंगे, हिंसा या पलायन की पृष्ठभूमि में
  • डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित कर सकते हैं

यह घोषणा हमेशा के लिए नहीं होगी — इसे समय-समय पर समीक्षा के बाद बदला या हटाया जा सकता है।

3. डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित होने के बाद वहां क्या बदल जाएगा?

अगर आपका इलाका डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित होता है, तो:

  • आप बिना प्रशासनिक अनुमति के घर/जमीन नहीं बेच सकेंगे
  • खासकर अलग-अलग समुदायों के बीच सौदों पर कड़ी जांच होगी
  • खरीदार और विक्रेता दोनों को कलेक्टर को शपथ पत्र देना होगा कि सौदा स्वेच्छा से हो रहा है और सही कीमत पर हो रहा है

Table 2: सामान्य क्षेत्र बनाम डिस्टर्ब्ड एरिया — फर्क समझिए

पहलू सामान्य क्षेत्र डिस्टर्ब्ड एरिया
प्रॉपर्टी बिक्री सीधे रजिस्ट्री संभव कलेक्टर की अनुमति जरूरी
समुदायों के बीच सौदा बिना रोक-टोक विशेष जांच
सौदे की वैधता सामान्य कानून के तहत एक्ट के तहत नियंत्रित
सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम अधिक
सौदा रद्द होने की संभावना कम अधिक

4. क्या जिला कलेक्टर किसी डील को रद्द भी कर सकते हैं?

हां। अगर कलेक्टर को लगे कि:

  • सौदा दबाव में कराया जा रहा है
  • किसी इलाके की जनसंख्या संरचना असंतुलित हो रही है
  • सौदा किसी समुदाय को जबरन हटाने की कोशिश है
  • सौदे में डर, धमकी या सामाजिक दबाव शामिल है

तो वे उस डील को रद्द कर सकते हैं

5. कानून तोड़ने पर क्या सजा हो सकती है?

ड्राफ्ट के अनुसार:

  • बिना अनुमति सौदा करने पर
  • खरीदार और विक्रेता दोनों पर केस दर्ज हो सकता है
  • अधिकतम 5 साल की जेल और जुर्माना संभव है
  • संपत्ति का रजिस्ट्रेशन भी निरस्त किया जा सकता है

6. क्या यह कानून सिर्फ मुस्लिम या किसी खास समुदाय के खिलाफ है?

सरकार का स्पष्ट कहना है — नहीं।

ड्राफ्ट में कहीं भी धर्म का नाम नहीं लिया गया है। यह कानून:

  • हिंदू पर भी लागू होगा
  • मुस्लिम पर भी लागू होगा
  • सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध — सभी पर समान रूप से लागू होगा

अगर कोई हिंदू मुस्लिम से घर खरीदना चाहेगा, तब भी अनुमति लेनी होगी।
अगर कोई मुस्लिम हिंदू से संपत्ति खरीदेगा, तब भी यही नियम होगा।

7. क्या गुजरात में ऐसा कानून पहले से लागू है?

हां। गुजरात में:

  • 1991 से डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट लागू है
  • वहां भी दंगा प्रभावित इलाकों में प्रॉपर्टी लेन-देन पर प्रशासनिक अनुमति जरूरी होती है
  • हर 5 साल में इसकी समीक्षा और संशोधन किया जाता है

राजस्थान सरकार उसी मॉडल को अपनाकर अपने कानून को तैयार कर रही है।

8. क्या इस कानून को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?

हां। भारत के संविधान के तहत:

  • अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसका अधिकार छीना गया है
  • या प्रशासन ने गलत तरीके से सौदा रोका है

तो वह:

  • हाई कोर्ट
  • या सुप्रीम कोर्ट

में इस कानून या किसी आदेश को चुनौती दे सकता है।

गुजरात का मामला जिसने देशभर में बहस छेड़ दी

हाल ही में गुजरात के सूरत में एक मामला सामने आया था, जहां:

  • एक हिंदू महिला अपनी संपत्ति एक मुस्लिम महिला को बेच रही थी
  • सोसाइटी के कुछ सदस्यों ने इस सौदे पर आपत्ति जताई
  • कलेक्टर ने इलाके को डिस्टर्ब्ड एरिया बताते हुए सौदा रोक दिया
  • संपत्ति को अस्थायी रूप से सील भी किया गया

इस घटना के बाद पूरे देश में सवाल उठे:

  • क्या यह कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करता?
  • क्या सरकार को यह अधिकार होना चाहिए कि वह तय करे कौन किसे घर बेचे?

राजस्थान में यही बहस अब तेज हो रही है।

Table 3: गुजरात और राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट — तुलना

पहलू गुजरात मॉडल राजस्थान प्रस्ताव
लागू वर्ष 1991 2026 (प्रस्तावित)
उद्देश्य दंगों के बाद पलायन रोकना पलायन और दबाव में सौदे रोकना
अनुमति प्रणाली जिला कलेक्टर जिला कलेक्टर
उल्लंघन पर सजा जेल + सौदा रद्द जेल + सौदा रद्द
धर्म का उल्लेख नहीं नहीं
कोर्ट में चुनौती संभव संभव

सरकार की दलील क्या है?

राजस्थान सरकार का कहना है:

  • कई इलाकों में लोग डर, दबाव और सामाजिक तनाव के कारण घर बेचने को मजबूर हुए
  • इससे गेट्टो बनने की स्थिति पैदा हुई
  • सामाजिक समरसता और कानून व्यवस्था पर असर पड़ा

सरकार का दावा है कि यह कानून:

  • कमजोर वर्गों को सुरक्षा देगा
  • जबरन विस्थापन रोकेगा
  • संवेदनशील इलाकों में शांति बनाए रखेगा
  • रियल एस्टेट में पारदर्शिता लाएगा

आलोचकों की चिंता क्या है?

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है:

  • इससे नागरिकों की संपत्ति बेचने की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है
  • प्रशासनिक अनुमति प्रक्रिया भ्रष्टाचार को जन्म दे सकती है
  • लोगों को अपने ही घर बेचने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे
  • इससे प्रॉपर्टी मार्केट धीमा हो सकता है

कुछ लोगों का मानना है कि इस कानून का दुरुपयोग कर राजनीतिक या सामाजिक दबाव बनाया जा सकता है।

आम नागरिक पर इसका असर क्या होगा?

अगर आप राजस्थान में रहते हैं और किसी ऐसे इलाके में रहते हैं जिसे डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित किया जाता है, तो:

फायदे:

  • डर या दबाव में घर बेचने से सुरक्षा
  • जबरन विस्थापन पर रोक
  • सामाजिक संतुलन बना रहेगा

संभावित नुकसान:

  • प्रॉपर्टी बेचने में समय ज्यादा लगेगा
  • प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी हो सकती है
  • सौदे में देरी या अनिश्चितता बढ़ सकती है

Table 4: आम नागरिक पर संभावित प्रभाव

क्षेत्र सकारात्मक असर नकारात्मक असर
सुरक्षा जबरन सौदे रुकेंगे प्रक्रिया जटिल हो सकती है
संपत्ति अधिकार संरक्षित होंगे स्वतंत्रता सीमित हो सकती है
सामाजिक संतुलन स्थिरता बढ़ेगी विवाद की संभावना
निवेश भरोसा बढ़ सकता है कुछ निवेशक पीछे हट सकते हैं

रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा?

रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स के मुताबिक:

  • संवेदनशील इलाकों में प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन की रफ्तार धीमी हो सकती है
  • डेवलपर्स को परियोजनाओं के लिए ज्यादा क्लीयरेंस लेने पड़ सकते हैं
  • लेकिन लंबी अवधि में इससे:स्थिरता आएगी
    जबरन सौदों पर रोक लगेगी
    निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है

क्या यह कानून पलायन रोक पाएगा?

सरकार का दावा है — हां।
लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं:

  • सिर्फ कानून से पलायन नहीं रुकता
  • इसके लिए रोजगार, सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक भरोसा भी जरूरी है
  • अगर कानून निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से लागू हुआ, तभी इसका उद्देश्य पूरा होगा

क्या यह राजनीतिक फैसला है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:

  • भारत में दंगे, पलायन और जनसंख्या संतुलन जैसे मुद्दे राजनीति से जुड़े रहे हैं
  • गुजरात मॉडल पहले से मौजूद है
  • राजस्थान सरकार उसी रास्ते पर चल रही है

हालांकि सरकार बार-बार कह रही है कि:

“यह कानून राजनीति नहीं, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए है।”

कानून लागू होने की प्रक्रिया क्या होगी?

  1. विधानसभा में विधेयक पेश होगा
  2. बहस और संशोधन के बाद पारित होगा
  3. राज्यपाल की मंजूरी मिलेगी
  4. गजट में अधिसूचना जारी होगी
  5. जिला प्रशासन नियम बनाकर लागू करेगा

अगर कोई सौदा रद्द होता है तो व्यक्ति क्या कर सकता है?

अगर किसी व्यक्ति की डील कलेक्टर द्वारा रद्द की जाती है, तो वह:

  • जिला स्तर पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है
  • इसके बाद हाई कोर्ट में अपील कर सकता है
  • अंतिम विकल्प सुप्रीम कोर्ट होता है

यानि कानून के खिलाफ न्यायिक उपाय खुले रहेंगे

क्या किरायेदारों पर भी असर पड़ेगा?

हां। ड्राफ्ट के अनुसार:

  • डिस्टर्ब्ड एरिया में किरायेदारों को
  • बिना वैध कारण बेदखल नहीं किया जा सकेगा
  • उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा दी जाएगी

इससे किराए पर रहने वाले कमजोर वर्गों को राहत मिलने की संभावना है।

Table 5: डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट के तहत किरायेदारों के अधिकार

अधिकार विवरण
बेदखली से सुरक्षा बिना कारण निकाला नहीं जा सकेगा
किराया विवाद प्रशासनिक संरक्षण
पुनर्वास सहायता जरूरत पड़ने पर मदद
कानूनी अपील कोर्ट जाने का अधिकार

विशेषज्ञों की राय — समाधान या नया विवाद?

समर्थन करने वालों का कहना:

  • यह कानून सामाजिक तनाव वाले इलाकों में स्थिरता लाएगा
  • कमजोर लोगों को मजबूरी में घर बेचने से बचाएगा
  • दंगों के बाद होने वाले पलायन पर रोक लगाएगा

आलोचकों का कहना:

  • इससे निजी संपत्ति अधिकार सीमित होंगे
  • प्रशासनिक भ्रष्टाचार बढ़ सकता है
  • समाज में अविश्वास और गहराएगा

निष्कर्ष: राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट — सुरक्षा कवच या नई चुनौती?

राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट 2026 एक ऐसा कानून है जो:

  • सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है
  • डर और दबाव में होने वाली प्रॉपर्टी डील रोकने का दावा करता है
  • दंगा प्रभावित इलाकों में पलायन रोकना चाहता है

लेकिन साथ ही:

  • यह व्यक्तिगत संपत्ति अधिकारों पर सवाल खड़े करता है
  • प्रशासनिक प्रक्रिया को जटिल बना सकता है
  • इसके दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है

अब असली परीक्षा यह होगी कि सरकार इसे कितनी पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ लागू करती है।


merarajasthannews की विशेष टिप्पणी:

कोई भी कानून तभी सफल होता है जब वह जनता के भरोसे के साथ लागू हो। अगर राजस्थान डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट का इस्तेमाल कमजोर वर्गों की रक्षा और सामाजिक सौहार्द बढ़ाने के लिए हुआ, तो यह मिसाल बनेगा। लेकिन अगर इसमें राजनीति, पक्षपात या भ्रष्टाचार घुसा, तो यह विवाद का नया अध्याय बन सकता है।

 

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