Prem Baisa Postmortem Report : प्रेम बाईसा मौत केस में बड़ा खुलासा, अस्थमा अटैक से गई जान, जांच में नहीं मिला जहर, मेडिकल बोर्ड और FSL की अंतिम रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई – मौत की गुत्थी सुलझी? प्रेम बाईसा केस में मेडिकल रिपोर्ट ने खोला बड़ा राज…

Hemant Singh
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Prem Baisa Postmortem Report : जोधपुर में कथावाचक के रूप में पहचान रखने वाली प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पिछले दिनों काफी चर्चा बटोरी थी। 28 जनवरी को आश्रम परिसर में उनकी मृत्यु के बाद मामले ने गंभीर मोड़ लिया, जब 29 जनवरी को उनके पिता ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने मेडिकल बोर्ड गठित कर पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच कराई। अब मेडिकल बोर्ड और एफएसएल की अंतिम रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है, जिसमें मौत का संभावित कारण अस्थमा अटैक बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार सांस रुकना मुख्य वजह माना गया है और जांच में किसी प्रकार के जहर या नशीले पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी पूरी तरह बंद नहीं की गई है और सभी पहलुओं की पड़ताल जारी रहेगी।

28 जनवरी की घटना से शुरू हुआ विवाद

28 जनवरी को आश्रम में प्रेम बाईसा की तबीयत अचानक बिगड़ने की सूचना सामने आई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई, जिसके बाद स्थिति गंभीर हो गई। बाद में उनकी मृत्यु की पुष्टि की गई। घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और मौत को लेकर संदेह जताया जाने लगा।

29 जनवरी को मृतका के पिता ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें मौत को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया और सैंपल फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में क्या सामने आया

मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद जो रिपोर्ट पुलिस को सौंपी गई, उसमें मौत का संभावित कारण अस्थमा अटैक बताया गया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्या के कारण सांस रुकने की स्थिति बनी, जो घातक साबित हुई।

डॉक्टरों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को पहले से अस्थमा की समस्या हो और अचानक तीव्र अटैक आए, तो समय पर उपचार न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शरीर में किसी बाहरी चोट या संदिग्ध रासायनिक प्रतिक्रिया के स्पष्ट संकेत नहीं मिले।

एफएसएल जांच में जहर की पुष्टि नहीं

मामले में उठे संदेहों को देखते हुए विसरा और अन्य सैंपल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए थे। एफएसएल की अंतिम रिपोर्ट में जहर या किसी नशीले पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई है। इसका मतलब है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मौत को विषाक्तता से जोड़ने के प्रमाण नहीं मिले।

नीचे जांच से जुड़े प्रमुख बिंदुओं का सार प्रस्तुत है:

जांच बिंदु निष्कर्ष
पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड द्वारा किया गया
संभावित कारण अस्थमा अटैक
मुख्य वजह सांस रुकना
एफएसएल रिपोर्ट जहर या नशीले पदार्थ की पुष्टि नहीं
पुलिस स्थिति जांच जारी, सभी पहलुओं की समीक्षा

यह जानकारी पुलिस को सौंपे गए दस्तावेजों पर आधारित है, जिनका अध्ययन जारी है।

पुलिस की जांच अब किस दिशा में

हालांकि मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट में जहर की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने कहा है कि मामला पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस सभी परिस्थितियों की जांच कर रही है, जिसमें घटनास्थल की स्थिति, उस समय मौजूद लोगों के बयान और मेडिकल इतिहास शामिल है।

जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि क्या मृतका को पहले से श्वसन संबंधी बीमारी थी और क्या घटना के समय उचित चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध थी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

परिवार की आशंकाएं और कानूनी प्रक्रिया

एफआईआर दर्ज होने के बाद परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब मेडिकल और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद पुलिस परिवार को भी निष्कर्षों की जानकारी दे रही है। यदि परिवार को रिपोर्ट पर कोई आपत्ति होती है, तो वे कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकते हैं।

कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस सभी साक्ष्यों का विश्लेषण कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे अदालत में प्रस्तुत किया जा सकता है। अदालत में ही आगे की कार्यवाही और अंतिम निर्णय होगा।

अस्थमा अटैक कितना खतरनाक हो सकता है

चिकित्सकीय दृष्टिकोण से देखें तो अस्थमा एक दीर्घकालिक श्वसन रोग है, जिसमें वायुमार्ग संकुचित हो जाते हैं और सांस लेने में कठिनाई होती है। यदि अचानक गंभीर अटैक आए और समय पर राहत न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा के मरीजों को नियमित दवा और इनहेलर साथ रखना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार किया जा सके। हालांकि इस मामले में अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर आधारित है।

सोशल चर्चाओं और वास्तविक जांच में अंतर

घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें सामने आईं। कुछ लोगों ने जहर या साजिश की संभावना जताई, जबकि आधिकारिक जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला। यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि संवेदनशील मामलों में आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी होता है।

पुलिस अधिकारियों ने अपील की है कि बिना पुष्टि के अफवाहें न फैलाएं और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने से बचें।

आगे क्या होगा

मेडिकल बोर्ड और एफएसएल की रिपोर्ट पुलिस को मिल चुकी है, लेकिन जांच प्रक्रिया का अंतिम चरण अभी शेष है। पुलिस सभी दस्तावेजों और बयानों का विश्लेषण कर निष्कर्षात्मक रिपोर्ट तैयार करेगी।

यदि जांच में किसी प्रकार की आपराधिक लापरवाही या अन्य अपराध का संकेत नहीं मिलता, तो मामला स्वाभाविक मृत्यु के रूप में दर्ज किया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

निष्कर्ष

प्रेम बाईसा मौत केस में सामने आई मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने कई सवालों के जवाब दिए हैं। रिपोर्ट में अस्थमा अटैक और सांस रुकने को संभावित कारण बताया गया है और जहर या नशीले पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है ताकि मामले में किसी भी प्रकार की शंका शेष न रहे।

यह मामला संवेदनशील होने के कारण प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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