Rajasthan building collapse : कोटा शहर में नॉनवेज रेस्टोरेंट की इमारत गिरने से हुआ हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माण की खौफनाक मिसाल बनकर सामने आया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस प्लॉट पर सिर्फ 10×20 वर्ग फीट की एक छोटी दुकान की अनुमति थी, वहां नियमों को ताक पर रखकर तीन मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई थी.
हैरानी की बात यह है कि इस अवैध निर्माण की जानकारी नगर निगम रिकॉर्ड में पहले से मौजूद थी, इसके बावजूद न तो समय पर निर्माण रोका गया और न ही आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया.
ड्रिलिंग और वाइब्रेशन बना हादसे की वजह
जानकारी के मुताबिक, 4 फरवरी से पास की एक अन्य अवैध इमारत को तोड़ने का काम शुरू किया गया था. इस दौरान ड्रिल हैमर और भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरे इलाके में तेज वाइब्रेशन फैल गया. स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले ही दिन से आसपास की इमारतों में कंपन महसूस होने लगा था.
धीरे-धीरे नॉनवेज रेस्टोरेंट की बिल्डिंग की दीवारों में गहरी दरारें आने लगीं, लेकिन इन चेतावनी संकेतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया.
शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई नहीं
स्थानीय दुकानदारों और रहवासियों ने कई बार नगर निगम और प्रशासन को शिकायतें दीं. लोगों ने स्पष्ट तौर पर बताया कि इमारत कभी भी गिर सकती है और बड़ा हादसा हो सकता है. इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य रोका गया, न ही भवन की स्ट्रक्चरल जांच करवाई गई.
आखिरकार वही हुआ, जिसकी आशंका जताई जा रही थी — कुछ ही दिनों में पूरी इमारत भरभराकर गिर पड़ी.
एक स्टूडेंट समेत 2 की मौत, 13 घायल
हादसे के वक्त इलाके में अफरा-तफरी मच गई. तेज धमाके जैसी आवाज के साथ बिल्डिंग गिरते ही लोग जान बचाकर भागने लगे. इस दर्दनाक हादसे में एक स्टूडेंट सहित दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल हो गए.
घायलों में से 5 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 8 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात करीब 3 बजे तक चला, जिसमें प्रशासन, पुलिस और SDRF की टीमों ने मलबा हटाकर फंसे लोगों को बाहर निकाला.
हादसे के बाद मालिक और स्टाफ फरार
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस बिल्डिंग में तोड़फोड़ और निर्माण कार्य चल रहा था, उसका मालिक और वहां काम कर रहा स्टाफ हादसे के बाद से फरार है. बताया जा रहा है कि निर्माण के दौरान किसी भी तरह के सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था.
न तो आसपास की इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया गया और न ही किसी विशेषज्ञ की राय ली गई.
पहले ही खारिज हो चुका था रेगुलाइजेशन आवेदन
नगर निगम रिकॉर्ड से यह भी सामने आया है कि हादसे वाली बिल्डिंग के मालिक ने पहले कमर्शियल रेगुलाइजेशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन नियमों के उल्लंघन के चलते उसे खारिज कर दिया गया था. इसके बावजूद अवैध रूप से तीन मंजिला निर्माण कर उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था.
यह सीधे तौर पर सिस्टम की कमजोरी और प्रशासनिक चूक को उजागर करता है.
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोटा में अवैध निर्माण लगातार बढ़ते जा रहे हैं और समय पर कार्रवाई न होने से बिल्डर बेखौफ हो चुके हैं. लोगों ने मांग की है कि:
- पूरे इलाके में बने अवैध निर्माणों की उच्चस्तरीय जांच हो
- हादसे के जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हों
- पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए
फिलहाल नगर निगम और जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.