Rajasthan Vidhan Sabha Budget Session 2026 : राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र 2026 का दूसरा दिन लोकतांत्रिक बहस से ज्यादा राजनीतिक टकराव और सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के नाम रहा। प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही सदन में ऐसा माहौल बना कि कुछ ही मिनटों में सरकार और विपक्ष आमने-सामने खड़े नजर आए। सड़क निर्माण से जुड़े सवाल पर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी का जवाब कांग्रेस विधायकों को इतना नागवार गुजरा कि वे अपनी सीटों से उठ खड़े हुए, नारेबाजी शुरू हो गई और स्थिति को संभालने के लिए स्पीकर वासुदेव देवनानी को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा।
- बजट सत्र का दूसरा दिन: उम्मीद बहस की, मिला हंगामा
- जैसे ही दीया कुमारी ने बोलना शुरू किया, सदन में मच गया शोर
- “इतना उत्तेजित क्यों हो रहे?” — दीया कुमारी का जवाब
- स्पीकर का सख्त रुख: “बैठो, व्यवस्था बनाए रखो”
- पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देकर दीया कुमारी ने रखे आंकड़े
- विपक्ष का आरोप: “सरकार आंकड़ों के खेल से सच्चाई छुपा रही है”
- मामला सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा — नशाखोरी और हुक्काबार पर भी गरमाई बहस
- मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म का जवाब: “हमारे समय में मामलों में आई गिरावट”
- जवाब सुनते ही फिर भड़का विपक्ष
- “पंगा लिया है तो भुक्तो” — सदन में सबसे ज्यादा विवादित टिप्पणी
- स्पीकर का दोबारा हस्तक्षेप: “मुद्दा सही है, लेकिन व्यवस्था जरूरी”
- सदन में तनाव का असर: कार्यवाही कई बार बाधित
- सड़क निर्माण विवाद: सरकार बनाम विपक्ष के प्रमुख तर्क
- नशाखोरी और हुक्काबार पर सत्ता-विपक्ष के दावे — तुलना तालिका
- राजनीतिक गलियारों में हलचल: बयान बनाम रणनीति
- दीया कुमारी की भूमिका: आंकड़ों की राजनीति या विकास की कहानी?
- गृह मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म की टिप्पणी पर विवाद क्यों बढ़ा?
- सदन की गरिमा बनाम राजनीतिक आक्रामकता — बड़ा सवाल
- आम जनता की प्रतिक्रिया: “हम बहस नहीं, समाधान चाहते हैं”
- बजट सत्र के आगे क्या?
- पूरा घटनाक्रम — एक नजर में (Quick Summary Table)
- निष्कर्ष: बहस की जगह टकराव, समाधान की जगह सियासत
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक प्रश्न तक सीमित नहीं रहा। नशाखोरी, हुक्काबार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर गृह मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म के जवाबों के दौरान भी विपक्ष का गुस्सा फूट पड़ा। सदन के भीतर शब्दों की तल्खी इस हद तक पहुंच गई कि कुछ वक्त के लिए विधानसभा का माहौल संसदीय बहस से ज्यादा राजनीतिक अखाड़े जैसा नजर आया।
जयपुर | merarajasthannews विशेष रिपोर्ट
यह रिपोर्ट आपको बताएगी —
- आखिर दीया कुमारी ने ऐसा क्या कहा जिससे कांग्रेस भड़क गई
- सड़क निर्माण के आंकड़ों पर क्यों मचा बवाल
- हुक्काबार और नशाखोरी पर मंत्री के जवाब ने क्यों बढ़ाया विवाद
- स्पीकर ने कैसे संभाली स्थिति
- विपक्ष सरकार पर क्या आरोप लगा रहा है
- सत्ता पक्ष ने पलटवार में क्या कहा
- और इस पूरे घटनाक्रम का राजस्थान की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है
बजट सत्र का दूसरा दिन: उम्मीद बहस की, मिला हंगामा
राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र आमतौर पर राज्य की आर्थिक दिशा, विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर विमर्श का मंच माना जाता है। लेकिन सत्र के दूसरे ही दिन सदन का माहौल उस अपेक्षा से अलग दिखाई दिया। जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी विधायक पहले से ही सरकार को घेरने के मूड में नजर आए।
शुरुआती सवाल सड़क निर्माण की स्थिति, बजट आवंटन और परियोजनाओं की प्रगति से जुड़ा था। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने जिन विकास कार्यों का दावा किया है, वे जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे। इसी सवाल के जवाब में जब उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी खड़ी हुईं, तो शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही सेकेंड में सदन में इतना बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो जाएगा।
जैसे ही दीया कुमारी ने बोलना शुरू किया, सदन में मच गया शोर
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने जवाब की शुरुआत करते हुए कहा कि वे पिछली सरकार और मौजूदा सरकार के कार्यों की तुलना करते हुए कुछ आंकड़े सदन के सामने रखना चाहती हैं। उन्होंने अभी बस यही कहा था कि “मैं कुछ आंकड़े रखना चाहती हूं,” लेकिन इससे पहले कि वे अपने जवाब को विस्तार दे पातीं, विपक्षी विधायक अपनी सीटों से उठ खड़े हुए।
कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ ने मेजें थपथपाईं, तो कुछ ने सरकार पर आंकड़ों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया। शोर इतना बढ़ गया कि कुछ सेकेंड तक दीया कुमारी अपनी बात ही पूरी नहीं कर पाईं।
“इतना उत्तेजित क्यों हो रहे?” — दीया कुमारी का जवाब
हंगामे के बीच उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष की ओर देखते हुए कहा —
“आइना आपको देखना चाहिए। मैंने सिर्फ इतना कहा कि मैं आंकड़े रखना चाहती हूं। मैंने ये नहीं कहा कि आपने कितना काम नहीं किया। आप इतना अग्रेसिव क्यों हो रहे हैं? आपको पता भी नहीं मैं क्या बोलने वाली हूं, फिर आप इतना उत्तेजित क्यों हो रहे हैं?”
उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस विधायकों को और ज्यादा नागवार गुजरी। कुछ विधायक और तेज आवाज में विरोध जताने लगे। सदन में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि स्पीकर वासुदेव देवनानी को अपनी कुर्सी से उठकर खुद हस्तक्षेप करना पड़ा।
स्पीकर का सख्त रुख: “बैठो, व्यवस्था बनाए रखो”
स्पीकर ने सदन को शांत कराने के लिए स्पष्ट शब्दों में कहा —
“बैठो, बैठो… अपने यहां व्यवस्था है। जिसका प्रश्न है, उसका उत्तर आने दें। आप खड़े हो जाएंगे तो उत्तर आएगा नहीं। उत्तर का अनुपूरक आने दें, फिर आप प्रश्न पूछ सकते हैं।”
स्पीकर की सख्ती के बाद कुछ देर के लिए शोर थमा और दीया कुमारी को अपनी बात पूरी करने का मौका मिला।
पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देकर दीया कुमारी ने रखे आंकड़े
शांति लौटने के बाद उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे किसी सरकार पर सीधा आरोप लगाने नहीं, बल्कि विकास कार्यों की स्थिति सामने रखने आई थीं। उन्होंने कहा —
“मैंने केवल यह कहा था कि कुछ आंकड़े रखना चाहूंगी। फिर आपने कैसे मान लिया कि मैं पिछले पांच साल में किए गए कामों की कमी गिनाने वाली हूं? पिछली सरकार की कहानी बाद में बताऊंगी, पहले पीपल्दा विधानसभा की बात कर लेती हूं।”
इसके बाद उन्होंने पीपल्दा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया —
- विधायक की ओर से 12 सड़कों की अनुशंसा की गई थी
- इनमें से 7 सड़कों की निविदाएं प्रक्रियाधीन हैं, जो 2 फरवरी 2026 तक प्राप्त हो जाएंगी
- 1 सड़क का निर्माण कार्य प्रगतिरत है
- शेष 4 सड़कों पर परीक्षण के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी
उनका कहना था कि सरकार सड़क निर्माण को लेकर गंभीर है और योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं।
विपक्ष का आरोप: “सरकार आंकड़ों के खेल से सच्चाई छुपा रही है”
कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार आंकड़ों के जरिए जमीनी हकीकत को ढंकने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का कहना था कि —
- सड़कें बदहाल हैं
- ग्रामीण इलाकों में संपर्क मार्ग टूट चुके हैं
- बजट घोषणाओं और वास्तविक कामों में भारी अंतर है
विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार केवल फाइलों और टेंडरों में विकास दिखा रही है, जबकि आम जनता को उसका लाभ नहीं मिल रहा।
मामला सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा — नशाखोरी और हुक्काबार पर भी गरमाई बहस
सदन की कार्यवाही जब आगे बढ़ी, तो दूसरा बड़ा विवाद नशाखोरी और हुक्काबार से जुड़े सवाल पर खड़ा हो गया। विपक्ष ने पूछा कि —
- क्या पुलिस हुक्काबार और नशे के अड्डों को सीज करने की मंशा रखती है?
- क्या सरकार पूरे राजस्थान में नशाखोरी रोकने के लिए कोई ठोस कानून लाने जा रही है?
- क्या कार्रवाई सिर्फ चुनिंदा जिलों तक सीमित है या पूरे राज्य में समान रूप से हो रही है?
इन सवालों के जवाब में गृह मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म खड़े हुए और उन्होंने आंकड़ों के जरिए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।
मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म का जवाब: “हमारे समय में मामलों में आई गिरावट”
गृह मंत्री ने कहा —
- वर्ष 2022 में नशाखोरी और संबंधित अपराधों के 55,226 मामले दर्ज हुए
- वर्ष 2025 में यह संख्या 25,885 रही
- सरकार के सत्ता में आने के बाद 2024 और 2025 में सख्त कार्रवाई की गई, जिससे मामलों की संख्या घटकर 12,598 रह गई
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने हुक्काबार, ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों के खिलाफ पूरे प्रदेश में व्यापक अभियान शुरू किया है।
जवाब सुनते ही फिर भड़का विपक्ष
मंत्री का जवाब सुनते ही विपक्षी विधायक फिर से भड़क उठे। उनका आरोप था कि सरकार पुराने आंकड़ों के जरिए खुद की पीठ थपथपा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बदले नहीं हैं। कुछ विधायकों ने कहा कि नशाखोरी ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक तेजी से फैल रही है और सरकार की कार्रवाई नाकाफी है।
“पंगा लिया है तो भुक्तो” — सदन में सबसे ज्यादा विवादित टिप्पणी
हंगामे के बीच मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने विपक्ष की ओर देखते हुए कहा —
“माननीय दूसरे प्रश्न का जवाब सुन लीजिए, मैंने नोट कर लिया। आप नंगा नाच कर रहे थे।”
इसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से यह टिप्पणी आई —
“नेता प्रतिपक्ष को प्रश्न पूछने का अधिकार है, लेकिन सवाल टोंक जिले का है और ये पूरे राजस्थान का पूछ रहे हैं, फिर जवाब भी सुनने को तैयार नहीं हैं। पंगा लिया है तो भुक्तो।”
इस वाक्य ने आग में घी डालने का काम किया। विपक्षी विधायक और ज्यादा उत्तेजित हो गए और सदन में फिर जोरदार हंगामा शुरू हो गया।
स्पीकर का दोबारा हस्तक्षेप: “मुद्दा सही है, लेकिन व्यवस्था जरूरी”
स्थिति बिगड़ती देख स्पीकर वासुदेव देवनानी को फिर हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा —
“माननीय मंत्री जी, सवाल टोंक जिले का है — यह इनका कहना ठीक है — लेकिन मैं सोचता हूं कि पूरे राजस्थान में हमें ज्यादा सतर्क होकर हुक्काबार और नशाखोरी को रोकने के प्रयास करने चाहिए। चाहे ये हों या वो हों।”
इसके बाद मंत्री ने विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा —
“आपने तो रोका नहीं, हमने रोका है। हमने सभी प्रकार के मादक पदार्थों और हुक्काबारों पर रोकथाम के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करके पूरे राजस्थान में नशा खत्म करने के लिए कार्रवाई शुरू की है।”
सदन में तनाव का असर: कार्यवाही कई बार बाधित
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। प्रश्नकाल में उठाए गए मुद्दों पर व्यवस्थित चर्चा के बजाय समय का बड़ा हिस्सा शोर-शराबे, टोका-टोकी और व्यवस्था बहाल करने में निकल गया।
सत्ता पक्ष का कहना था कि विपक्ष जानबूझकर सदन नहीं चलने दे रहा, जबकि विपक्ष का आरोप था कि सरकार जवाब देने से बच रही है और आंकड़ों की आड़ में सच्चाई छुपा रही है।
सड़क निर्माण विवाद: सरकार बनाम विपक्ष के प्रमुख तर्क
नीचे टेबल में दोनों पक्षों के मुख्य तर्क सरल रूप में समझिए —
| विषय | सरकार का पक्ष | विपक्ष का पक्ष |
|---|---|---|
| सड़क निर्माण | नई परियोजनाएं स्वीकृत, कई सड़कों पर काम प्रगतिरत | जमीनी स्तर पर सड़कें टूटी हुई, विकास दिखावा |
| बजट आवंटन | पर्याप्त धनराशि जारी की गई | राशि का उपयोग सही ढंग से नहीं |
| परियोजनाओं की गति | निविदाएं प्रक्रियाधीन, जल्द काम पूरा होगा | काम की रफ्तार बेहद धीमी |
| पारदर्शिता | आंकड़ों के जरिए स्थिति स्पष्ट | आंकड़ों में हेरफेर का आरोप |
नशाखोरी और हुक्काबार पर सत्ता-विपक्ष के दावे — तुलना तालिका
| मुद्दा | सरकार का दावा | विपक्ष का आरोप |
|---|---|---|
| दर्ज मामलों की संख्या | 2022 की तुलना में 2025 में बड़ी गिरावट | आंकड़े हकीकत नहीं दिखाते |
| कार्रवाई | स्पेशल टास्क फोर्स गठित, लगातार छापेमारी | कार्रवाई सिर्फ दिखावटी |
| कानून व्यवस्था | स्थिति पहले से बेहतर | नशा गांव-गांव तक फैल चुका |
| राजनीतिक इच्छाशक्ति | सरकार गंभीर | इच्छाशक्ति की कमी |
राजनीतिक गलियारों में हलचल: बयान बनाम रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव सिर्फ एक प्रश्नकाल की बहस नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का संकेत है। विपक्ष इस बजट सत्र को सरकार की नीतियों पर हमला करने के मंच के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है, जबकि सरकार विकास कार्यों के जरिए अपनी उपलब्धियां गिनाने की कोशिश कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार —
- कांग्रेस सरकार पर “विफल शासन” का नैरेटिव मजबूत करना चाहती है
- भाजपा सरकार विपक्ष को “अराजक और नकारात्मक राजनीति” के रूप में पेश करना चाहती है
- दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों को संदेश देना चाहते हैं कि वे जनहित के मुद्दों पर मुखर हैं
दीया कुमारी की भूमिका: आंकड़ों की राजनीति या विकास की कहानी?
उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी की शैली को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। समर्थकों का कहना है कि वे आंकड़ों के जरिए सरकार के कामकाज को पारदर्शी तरीके से पेश करना चाहती थीं, लेकिन विपक्ष ने बिना पूरी बात सुने ही हंगामा खड़ा कर दिया।
वहीं आलोचकों का मानना है कि तुलना की राजनीति अपने आप में विवाद को जन्म देती है और सदन में पहले से तनावपूर्ण माहौल में ऐसे बयान स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।
गृह मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म की टिप्पणी पर विवाद क्यों बढ़ा?
“पंगा लिया है तो भुक्तो” जैसी टिप्पणी को विपक्ष ने असंसदीय और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि मंत्री के इस बयान से सरकार की असहिष्णुता उजागर होती है।
सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर उकसाने की राजनीति कर रहा था और जवाबी टिप्पणी भावनात्मक प्रतिक्रिया थी, न कि किसी को अपमानित करने का इरादा।
सदन की गरिमा बनाम राजनीतिक आक्रामकता — बड़ा सवाल
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि —
- क्या विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर इस तरह का शोर-शराबा लोकतंत्र को मजबूत करता है?
- क्या तीखी भाषा जनता के मुद्दों को सुलझाने में मदद करती है या उन्हें और उलझा देती है?
- क्या राजनीतिक दल जनहित से ज्यादा अपने सियासी संदेश देने में व्यस्त हो गए हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि ऐसे दृश्य बार-बार सामने आते रहे, तो जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
आम जनता की प्रतिक्रिया: “हम बहस नहीं, समाधान चाहते हैं”
सोशल मीडिया और स्थानीय प्रतिक्रिया में आम लोगों ने इस घटनाक्रम पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कई नागरिकों का कहना है कि —
- सड़कें वाकई खराब हैं, लेकिन समाधान बहस से नहीं, काम से निकलेगा
- नशाखोरी बढ़ रही है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से स्थिति नहीं सुधरेगी
- विधानसभा को लड़ाई का मंच नहीं, समाधान का मंच बनना चाहिए
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए और जनता के मुद्दों पर ठोस चर्चा करनी चाहिए।
बजट सत्र के आगे क्या?
राजनीतिक संकेतों के अनुसार, आने वाले दिनों में भी विधानसभा का माहौल गर्म रह सकता है। विपक्ष सरकार को सड़क, कानून-व्यवस्था, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपनी योजनाओं और विकास कार्यों को आंकड़ों के साथ पेश करने पर जोर देगी।
यदि दोनों पक्षों का यही रुख बना रहा, तो सत्र के बाकी दिन भी तीखी बहस, हंगामे और स्पीकर के बार-बार हस्तक्षेप से भरे रह सकते हैं।
पूरा घटनाक्रम — एक नजर में (Quick Summary Table)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मुद्दा | सड़क निर्माण और नशाखोरी |
| विवाद की शुरुआत | दीया कुमारी के आंकड़ों पर बयान से |
| विपक्ष की प्रतिक्रिया | हंगामा, नारेबाजी |
| स्पीकर की भूमिका | दो बार हस्तक्षेप, व्यवस्था बहाल |
| बड़ा विवाद | “पंगा लिया है तो भुक्तो” टिप्पणी |
| सत्ता पक्ष का रुख | कार्रवाई और आंकड़ों का बचाव |
| विपक्ष का आरोप | सरकार जवाब से बच रही |
| असर | सदन की कार्यवाही कई बार बाधित |
निष्कर्ष: बहस की जगह टकराव, समाधान की जगह सियासत
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र का यह दिन लोकतंत्र की जीवंतता से ज्यादा उसकी चुनौतियों को उजागर करता दिखा। जहां एक ओर सरकार विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था पर अपनी उपलब्धियां गिनाने की कोशिश कर रही थी, वहीं विपक्ष सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए था।
लेकिन सवाल यह है कि —
- क्या इस टकराव से सड़कें सुधरेंगी?
- क्या नशाखोरी कम होगी?
- क्या आम जनता की समस्याओं का समाधान होगा?
इन सवालों का जवाब सदन में नारेबाजी से नहीं, बल्कि गंभीर चर्चा, पारदर्शी नीति और प्रभावी क्रियान्वयन से मिलेगा। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सत्ता और विपक्ष एक-दूसरे से टकराएं जरूर, लेकिन जनता के हित सर्वोपरि रहें।