Monkey Attack Viral Video : कुर्सी पर बैठी बुजुर्ग पर बंदरों का अचानक हमला, सिर-हाथ बुरी तरह जख्मी; बहादुरगढ़ में फैली दहशत | VIDEO वायरल

Hemant Singh
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Viral Video Bahadurgarh Monkey Attack News: हरियाणा के बहादुरगढ़ के बत्रा कॉलोनी इलाके में बंदरों के आतंक ने एक बार फिर लोगों को दहला दिया है। घर के बाहर कुर्सी पर बैठकर धूप सेंक रही एक बुजुर्ग महिला पर अचानक बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। महिला के सिर, हाथ और शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आई हैं। यह पूरी घटना पास लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के बाद इलाके में भय का माहौल है और लोग प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बहादुरगढ़ में बंदरों का आतंक: एक शांत दोपहर अचानक बन गई खौफनाक

शहरों और कस्बों में जंगली जानवरों का प्रवेश अब आम होता जा रहा है, लेकिन जब ये जानवर सीधे इंसानों पर हमला करने लगें तो मामला केवल असुविधा का नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा का गंभीर संकट बन जाता है। बहादुरगढ़ के बत्रा कॉलोनी क्षेत्र में हुई यह घटना इसी बढ़ते खतरे का ताजा उदाहरण है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बुजुर्ग महिला अपने घर के बाहर कुर्सी पर बैठकर धूप ले रही थीं। तभी गली से गुजर रहे बंदरों के एक झुंड ने अचानक उन्हें निशाना बना लिया। कुछ ही सेकंड में तीन से चार बंदर महिला पर झपट पड़े और उन्हें बुरी तरह नोच डाला। आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही महिला जमीन पर गिर चुकी थीं।

यह हमला इतना अचानक और हिंसक था कि इलाके में रहने वाले लोग दहशत में आ गए। महिला की चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी दौड़े और शोर मचाकर किसी तरह बंदरों को भगाया। लेकिन तब तक महिला गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं।

कौन हैं पीड़िता? क्या है पूरा मामला

पीड़िता की पहचान संतोष देवी, पत्नी अमरनाथ बत्रा के रूप में हुई है। वे बत्रा कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहती हैं। घटना 26 दिसंबर दोपहर की बताई जा रही है, जब मौसम ठंडा होने के कारण वे घर के बाहर धूप सेंक रही थीं।

स्थानीय लोगों के अनुसार:

  • गली में अचानक बंदरों का झुंड दिखाई दिया
  • बिना किसी उकसावे के बंदरों ने महिला पर हमला कर दिया
  • महिला को सिर, हाथ और पीठ पर कई जगह काटा गया
  • कुछ देर तक वह खुद को बचाने में असमर्थ रहीं

इस घटना का CCTV फुटेज सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि हमला पूरी तरह अचानक और बेहद हिंसक था। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला कुर्सी पर बैठी हैं, तभी बंदर पीछे से आते हैं और उन पर झपट पड़ते हैं।

CCTV VIDEO वायरल, सोशल मीडिया पर आक्रोश

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया तेज हो गई है। वीडियो को X (पूर्व ट्विटर) पर @Khushi75758998 नामक अकाउंट से शेयर किया गया, जिसके बाद हजारों लोगों ने इसे देखा और प्रशासन पर सवाल उठाए।

लोगों ने लिखा:

  • “अब अपने घर के बाहर बैठना भी सुरक्षित नहीं रहा।”
  • “नगर परिषद आखिर कब जागेगी?”
  • “बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।”

वीडियो ने इस मुद्दे को सिर्फ बहादुरगढ़ तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि पूरे राज्य में शहरी इलाकों में बढ़ते बंदर आतंक पर बहस छेड़ दी है।

अस्पताल में भर्ती, हालत अब स्थिर लेकिन मानसिक रूप से डरी

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने घायल महिला को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार:

  • महिला के सिर और हाथों पर गहरे घाव हैं
  • कई जगह टांके लगाए गए
  • एंटी-रेबीज इंजेक्शन और अन्य दवाएं दी गईं
  • फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है

हालांकि परिजनों का कहना है कि महिला मानसिक रूप से बेहद डरी हुई हैं। अब वे अकेले बाहर बैठने या घर से निकलने में भी डर महसूस कर रही हैं।

बहादुरगढ़ में डर का माहौल, लोग घर से बाहर निकलने से कतरा रहे

इस घटना के बाद बत्रा कॉलोनी ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी लोगों में डर का माहौल बन गया है। कई परिवारों ने बच्चों को बाहर खेलने से रोक दिया है। बुजुर्गों को अकेले बाहर निकलने से मना किया जा रहा है।

स्थानीय निवासी बताते हैं:

“पहले बंदर सिर्फ छतों पर दिखते थे, अब गलियों और दरवाजों तक आ गए हैं। खाना छीन लेते हैं, कपड़े खींच लेते हैं और अब तो लोगों पर हमला भी करने लगे हैं।”

लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में बंदरों द्वारा काटने और हमला करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

पार्षद प्रतिनिधि का बयान: “नगर परिषद पूरी तरह नाकाम”

वार्ड नंबर-15 के पार्षद प्रतिनिधि भूपेंद्र राठी ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा:

“इलाके में बंदरों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। कई बार शिकायतें देने के बावजूद नगर परिषद कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। यह हमला प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है।”

उन्होंने मांग की कि:

  • बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाए
  • प्रभावित इलाकों में नियमित गश्त और निगरानी की जाए
  • लोगों को जागरूक किया जाए कि ऐसे हालात में क्या करें

शहरों में बंदरों का बढ़ता आतंक: आखिर क्यों हो रही हैं ऐसी घटनाएं?

बहादुरगढ़ की यह घटना अकेली नहीं है। दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में आए दिन बंदरों द्वारा लोगों पर हमला करने की खबरें सामने आती रहती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई वजहें हैं:

1. जंगलों का सिकुड़ना और प्राकृतिक आवास का खत्म होना

तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण बंदरों के प्राकृतिक जंगल क्षेत्र खत्म हो रहे हैं। भोजन और आश्रय की तलाश में वे रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं।

2. इंसानों द्वारा बंदरों को खाना खिलाना

मंदिरों, कॉलोनियों और सड़कों पर लोग बंदरों को केले, बिस्कुट और अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं। इससे उनमें इंसानों पर निर्भरता बढ़ जाती है और वे आक्रामक हो जाते हैं।

3. कचरा प्रबंधन की कमी

खुले कूड़ेदान, गंदगी और खाद्य अपशिष्ट बंदरों को आकर्षित करते हैं। जब उन्हें नियमित भोजन मिलने लगता है, तो वे उसी इलाके को अपना क्षेत्र मान लेते हैं।

4. नस्लीय वृद्धि और नियंत्रण की कमी

बंदरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनके नियंत्रण और पुनर्वास की ठोस योजना नहीं बन पा रही है।

बुजुर्गों और बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि बंदरों के हमलों का सबसे ज्यादा शिकार बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं बनते हैं। इसके पीछे कारण हैं:

  • बुजुर्गों की प्रतिक्रिया धीमी होती है
  • बच्चे डरकर भागने लगते हैं, जिससे बंदर पीछा करते हैं
  • महिलाएं अक्सर अकेले घर के बाहर रहती हैं

बहादुरगढ़ की इस घटना में भी पीड़िता बुजुर्ग महिला थीं, जो अकेली बैठी थीं और खुद को बचाने में असमर्थ रहीं।

बंदर काटने से होने वाले खतरे: सिर्फ चोट नहीं, जानलेवा बीमारी का भी डर

बंदर के काटने या खरोंच लगने से सिर्फ शारीरिक चोट ही नहीं होती, बल्कि रेबीज (Rabies) जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा भी बना रहता है।

डॉक्टरों के अनुसार:

  • बंदर के काटने के बाद तुरंत घाव को साबुन और पानी से धोना चाहिए
  • बिना देरी किए एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी है
  • टिटनेस का टीका भी जरूरी हो सकता है

कई मामलों में लोग इसे हल्के में ले लेते हैं, जो बाद में गंभीर परिणाम दे सकता है।

हाल के वर्षों में बंदर हमलों की बढ़ती घटनाएं (तालिका)

वर्ष शहरी इलाकों में रिपोर्टेड बंदर हमले गंभीर घायल अस्पताल में भर्ती
2022 1,350+ मामले 410 290
2023 1,780+ मामले 560 390
2024 2,100+ मामले 710 520
2025 2,400+ मामले (अनुमानित) 820 600

नोट: ये आंकड़े विभिन्न स्थानीय निकायों और अस्पताल रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।

बहादुरगढ़ जैसे शहर क्यों बन रहे हैं हॉटस्पॉट?

बहादुरगढ़ दिल्ली से सटा हुआ तेजी से विकसित होता शहरी क्षेत्र है। यहां:

  • नई कॉलोनियां और सोसायटी बन रही हैं
  • खुले इलाके और पेड़ों की कटाई बढ़ रही है
  • कचरा प्रबंधन व्यवस्था कमजोर है

इन सभी कारणों से बंदर आसानी से रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं और लोगों के साथ उनका टकराव बढ़ता जा रहा है।

प्रशासन की जिम्मेदारी और अब तक की नाकामी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि:

  • नगर परिषद को कई बार शिकायतें दी गईं
  • कुछ जगहों पर अस्थायी तौर पर बंदरों को भगाया गया
  • लेकिन कोई स्थायी समाधान लागू नहीं हुआ

लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल घटना के बाद जागता है, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है।

विशेषज्ञों की राय: बंदरों को मारना समाधान नहीं, चाहिए वैज्ञानिक पुनर्वास

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बंदरों को मारना या जबरन भगाना समाधान नहीं है। इसके बजाय:

  • उन्हें पकड़कर सुरक्षित जंगल क्षेत्रों में छोड़ा जाना चाहिए
  • नसबंदी कार्यक्रम लागू किए जाने चाहिए
  • शहरों में भोजन स्रोतों को नियंत्रित किया जाना चाहिए
  • लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए कि बंदरों को खाना न खिलाएं

जब तक यह कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी।

पीड़िता परिवार की आपबीती: “अब घर के बाहर बैठने से भी डर लगता है”

पीड़िता के बेटे ने बताया:

“मां रोज़ की तरह धूप ले रही थीं। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि ऐसा कुछ हो जाएगा। अब वे हर वक्त डरी रहती हैं। दरवाजा खुला देखते ही घबरा जाती हैं।”

परिवार का कहना है कि अगर समय रहते लोग न आते, तो मामला और भी गंभीर हो सकता था।

जनता में गुस्सा: “क्या किसी की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन?”

घटना के बाद स्थानीय निवासियों ने विरोध जताते हुए कहा:

  • “हर बार कोई हादसा होता है, तब अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और चले जाते हैं।”
  • “बच्चों और बुजुर्गों की जान की कोई कीमत नहीं है क्या?”
  • “अगर आज कार्रवाई नहीं हुई, तो कल कोई और शिकार बनेगा।”

लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।

ऐसे हालात में क्या करें? (सुरक्षा गाइड)

अगर आपके इलाके में बंदरों का आतंक है, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  1. बाहर अकेले बैठने से बचें
  2. बच्चों को अकेले खेलने न दें
  3. हाथ में खाने-पीने की चीज लेकर बाहर न निकलें
  4. बंदर दिखें तो उन्हें आंखों में आंख डालकर न देखें
  5. शोर न मचाएं और धीरे-धीरे पीछे हट जाएं
  6. अगर हमला हो जाए तो तुरंत मेडिकल मदद लें

क्या कहता है कानून? नगर निकायों की जिम्मेदारी

नगर पालिका अधिनियम और स्थानीय निकाय नियमों के अनुसार:

  • शहरी क्षेत्रों में जंगली जानवरों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है
  • खतरा पैदा करने वाले जानवरों को नियंत्रित करना नगर परिषद का दायित्व है
  • यदि लापरवाही के कारण किसी को नुकसान होता है, तो प्रशासन पर जवाबदेही बनती है

लेकिन व्यवहार में अक्सर इन नियमों का पालन नहीं हो पाता।

क्या यह घटना किसी बड़े संकट की चेतावनी है?

बहादुरगढ़ की यह घटना सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि शहरी भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते संकट की चेतावनी है। अगर आज बंदरों का आतंक अनदेखा किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।

यह सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है कि:

  • हम प्रकृति और वन्यजीवों के साथ संतुलन बनाए रखें
  • उन्हें भोजन देकर शहरों में बसने के लिए प्रेरित न करें
  • और सरकार पर दबाव बनाएं कि स्थायी समाधान निकाले जाएं

मनोवैज्ञानिक प्रभाव: पीड़ितों पर लंबे समय तक रहता है डर

मनोचिकित्सकों के अनुसार, अचानक हुए ऐसे हमले पीड़ितों में:

  • पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस
  • डर और घबराहट
  • अकेले बाहर निकलने से झिझक
  • नींद की समस्या

जैसी मानसिक परेशानियां पैदा कर सकते हैं। बुजुर्गों में इसका असर और भी गहरा होता है।

देशभर में बढ़ रही मानव-बंदर टकराव की घटनाएं

दिल्ली, आगरा, वृंदावन, जयपुर, मथुरा, हरिद्वार और अब बहादुरगढ़ जैसे शहर इस समस्या से जूझ रहे हैं। कहीं बंदर लोगों से खाना छीन रहे हैं, कहीं काट रहे हैं और कहीं तो छत से धक्का देकर जान तक ले चुके हैं।

यह स्थिति बताती है कि यह सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की समस्या बन चुकी है।

डॉक्टरों की सलाह: बंदर काटने के बाद क्या न करें?

  • घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें
  • घाव को खुला न छोड़ें
  • इलाज में देरी न करें
  • बिना डॉक्टर की सलाह दवा न लें

कई मामलों में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

प्रशासन से जनता की प्रमुख मांगें

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  1. बंदरों को पकड़कर सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ा जाए
  2. प्रभावित इलाकों में नियमित निगरानी टीम बनाई जाए
  3. कचरा प्रबंधन व्यवस्था सुधारी जाए
  4. बंदरों को खाना खिलाने पर सख्ती से रोक लगे
  5. पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए

निष्कर्ष: बहादुरगढ़ की यह घटना चेतावनी है, अब और लापरवाही नहीं चलेगी

बत्रा कॉलोनी में बुजुर्ग महिला पर हुआ यह हमला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर है। जिस तरह से महिला को अपने ही घर के बाहर बैठकर जानलेवा हमला झेलना पड़ा, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

अब सवाल यह नहीं है कि घटना क्यों हुई, बल्कि यह है कि क्या इससे पहले कि अगला शिकार कोई बच्चा या बुजुर्ग बने, प्रशासन ठोस कदम उठाएगा या नहीं?

लोगों की नजरें अब नगर परिषद और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वे इस मामले को गंभीरता से लेकर स्थायी समाधान निकालते हैं या फिर यह मामला भी कुछ दिनों में फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा.

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