Rajasthan Hailstorm Warning : राजस्थान इस समय मौसम के सबसे खतरनाक दौर से गुजर रहा है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है और नागौर में तो पारा गिरकर -1.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसे मौसम वैज्ञानिक “जहरीली ठंड” की श्रेणी में मान रहे हैं। खेतों में पाला जम चुका है, गाड़ियों की छतें बर्फ से ढकी दिख रही हैं और खुले में रखे पानी के बर्तन तक जम गए हैं।
- राजस्थान में क्यों कहर बन गई यह ठंड? — “जहरीली ठंड” का वैज्ञानिक अर्थ
- नागौर बना राजस्थान का फ्रीजर — पारा गिरा -1.3°C
- फतेहपुर में भी शून्य से नीचे तापमान — खेत बने सफेद मैदान
- पूरे राजस्थान में ठंड का आतंक — जनजीवन बुरी तरह प्रभावित
- रविवार को राजस्थान के प्रमुख जिलों का न्यूनतम तापमान (तालिका)
- क्यों आई इतनी जबरदस्त ठंड? — मौसम विज्ञान की सरल भाषा में समझिए
- 26–27 जनवरी को नया पश्चिमी विक्षोभ — राहत भी, खतरा भी
- पश्चिमी विक्षोभ का दिनवार प्रभाव (तालिका)
- किन संभागों में बारिश और ओले गिरने की सबसे ज्यादा संभावना?
- संभावित खतरे वाले जिले (तालिका)
- क्या मिलेगी शीतलहर से राहत? — तापमान बढ़ने का अनुमान
- पाला क्या होता है और यह फसलों के लिए कितना खतरनाक है?
- राजस्थान में किन फसलों को सबसे ज्यादा खतरा?
- फसलों पर पाले का संभावित असर (तालिका)
- कृषि विभाग की किसानों को विशेष सलाह
- ओलावृष्टि से कितना नुकसान हो सकता है?
- आम जनता पर ठंड का असर — स्वास्थ्य संकट बढ़ा
- पशुपालन पर भी भारी असर
- सड़क और रेल यातायात पर असर
- पश्चिमी विक्षोभ के बाद लौट सकता है घना कोहरा — क्यों?
- अगले 72 घंटों का विस्तृत मौसम आउटलुक
- 26–28 जनवरी का संभावित मौसम प्रभाव (तालिका)
- मौसम विभाग का अलर्ट लेवल
- विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
- गणतंत्र दिवस समारोहों पर भी पड़ेगा असर
- क्यों कहा जा रहा है इसे “जहरीली ठंड”?
- प्रशासन की आम जनता से अपील
- निष्कर्ष: राहत आने वाली है, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं
इसी बीच राहत और खतरे दोनों की खबर सामने आई है — 26 जनवरी से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर 27 जनवरी को देखने को मिलेगा। इस सिस्टम के चलते जयपुर, अजमेर, बीकानेर, भरतपुर और कोटा संभाग के कई जिलों में बारिश, मेघगर्जन, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
merarajasthannews की यह रिपोर्ट पूरी तरह से प्रमाणिक, सत्यापित, ग्राउंड-बेस्ड और किसी भी तरह की अफवाह, अनुमान या भ्रामक जानकारी से मुक्त है। नीचे आपको मिलेगा —
- राजस्थान के हर जिले का तापमान विश्लेषण
- किसानों के लिए खतरे और बचाव की सलाह
- पश्चिमी विक्षोभ का वैज्ञानिक प्रभाव
- शीतलहर और पाले से होने वाले नुकसान की पूरी तस्वीर
- अगले 72 घंटों का सटीक मौसम आउटलुक
- टेबल्स, अलर्ट जोन और ज़मीनी असर की पूरी रिपोर्ट
राजस्थान में क्यों कहर बन गई यह ठंड? — “जहरीली ठंड” का वैज्ञानिक अर्थ
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जब किसी क्षेत्र में तापमान लगातार जमाव बिंदु (0°C) से नीचे चला जाता है और हवा में नमी की मात्रा अधिक होती है, तो इसे सामान्य सर्दी नहीं बल्कि “खतरनाक शीतलहर” या “जहरीली ठंड” कहा जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर:
- मानव स्वास्थ्य पर
- फसलों पर
- पशुधन पर
- सड़क और रेल यातायात पर
- बिजली और पानी की आपूर्ति पर
पड़ता है।
राजस्थान में इस समय जो स्थिति बनी है, वह इसी श्रेणी में आती है।
नागौर बना राजस्थान का फ्रीजर — पारा गिरा -1.3°C
पिछले 24 घंटों में राजस्थान का सबसे ठंडा स्थान नागौर रहा, जहां न्यूनतम तापमान -1.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह इस सीजन का अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
नागौर के ग्रामीण इलाकों में सुबह के समय खेतों पर जमी बर्फ की परतें साफ दिखाई दीं। किसानों के अनुसार, सब्जियों, सरसों, चना और जीरा की फसलों पर पाले का सीधा असर पड़ा है।
फतेहपुर में भी शून्य से नीचे तापमान — खेत बने सफेद मैदान
सीकर जिले के फतेहपुर क्षेत्र में न्यूनतम तापमान -0.7°C दर्ज किया गया। यहां भी सुबह के समय फसलों और वाहनों की छतों पर बर्फ की मोटी परत देखी गई।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय खुले खेतों में खड़ी फसलों की पत्तियां जमकर झुलस गईं और सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान की आशंका है।
पूरे राजस्थान में ठंड का आतंक — जनजीवन बुरी तरह प्रभावित
राज्य के अधिकांश हिस्सों में:
- सुबह-सुबह घना कोहरा
- तेज बर्फीली हवाएं
- स्कूल जाने वाले बच्चों की परेशानी
- बुजुर्गों और बीमार लोगों में स्वास्थ्य जोखिम
- पशुओं में ठंड से संक्रमण
जैसी स्थितियां बनी हुई हैं।
ग्रामीण इलाकों में लोग अलाव जलाकर रात गुजार रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में हीटर और ब्लोअर का उपयोग बढ़ गया है।
रविवार को राजस्थान के प्रमुख जिलों का न्यूनतम तापमान (तालिका)
| जिला | न्यूनतम तापमान (°C) | स्थिति |
|---|---|---|
| नागौर | -1.3 | अत्यधिक शीतलहर |
| फतेहपुर (सीकर) | -0.7 | पाला जमने की स्थिति |
| चूरू | 2.6 | कड़ाके की ठंड |
| पिलानी | 2.6 | शीतलहर |
| माउंट आबू | 2.9 | ठंडी हवाएं |
| बीकानेर | 3.1 | ठंड बनी |
| अलवर | 4.0 | ठंड का असर |
| झुंझुनूं | 3.4 | शीतलहर |
| जयपुर | 5.6 | ठंडक बनी |
| अजमेर | 6.1 | सामान्य सर्दी |
क्यों आई इतनी जबरदस्त ठंड? — मौसम विज्ञान की सरल भाषा में समझिए
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार राजस्थान में ठंड बढ़ने के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
- उत्तर भारत से आ रही शुष्क और ठंडी हवाएं
- रात में साफ आसमान और कम बादल, जिससे जमीन की गर्मी तेजी से बाहर निकल जाती है
- पिछले पश्चिमी विक्षोभ का अवशेष प्रभाव, जिसने वातावरण में नमी बढ़ा दी
इन तीनों फैक्टर के कारण राजस्थान के कई हिस्सों में रेड जोन लेवल की शीतलहर बनी हुई है।
26–27 जनवरी को नया पश्चिमी विक्षोभ — राहत भी, खतरा भी
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार, 26 जनवरी से एक नया और प्रभावशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसका सबसे ज्यादा असर 27 जनवरी को देखने को मिलेगा।
यह सिस्टम राजस्थान के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों से प्रवेश करेगा और धीरे-धीरे मध्य तथा पूर्वी जिलों को प्रभावित करेगा।
पश्चिमी विक्षोभ का दिनवार प्रभाव (तालिका)
| तारीख | मौसम स्थिति |
|---|---|
| 26 जनवरी सुबह | अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क |
| 26 जनवरी दोपहर/शाम | पश्चिमी राजस्थान में बादल बढ़ेंगे |
| 27 जनवरी | बारिश, ओलावृष्टि, तेज हवाओं की प्रबल संभावना |
| 28 जनवरी | तापमान में बढ़ोतरी, लेकिन कोहरा लौट सकता है |
किन संभागों में बारिश और ओले गिरने की सबसे ज्यादा संभावना?
मौसम विभाग के अनुसार, 27 जनवरी को इन संभागों में मौसम सबसे ज्यादा बिगड़ सकता है:
- जयपुर संभाग
- अजमेर संभाग
- बीकानेर संभाग
- भरतपुर संभाग
- कोटा संभाग
इन क्षेत्रों में:
- मेघगर्जन
- आकाशीय बिजली
- हल्की से मध्यम बारिश
- 30 से 40 किमी/घंटा की तेज हवाएं
- कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि
होने की चेतावनी जारी की गई है।
संभावित खतरे वाले जिले (तालिका)
| संभाग | संभावित प्रभावित जिले |
|---|---|
| जयपुर | जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, दौसा |
| अजमेर | अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक |
| बीकानेर | बीकानेर, चूरू, नागौर |
| भरतपुर | अलवर, भरतपुर, धौलपुर |
| कोटा | कोटा, बूंदी, बारां |
क्या मिलेगी शीतलहर से राहत? — तापमान बढ़ने का अनुमान
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण अगले 48 घंटों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है।
इससे:
- रात की ठंड में कुछ राहत मिलेगी
- सुबह के समय पाले की संभावना कम होगी
- लेकिन बारिश के बाद नमी बढ़ने से घना कोहरा फिर लौट सकता है
यानि राहत अस्थायी होगी, पूरी तरह ठंड से छुटकारा नहीं मिलेगा।
पाला क्या होता है और यह फसलों के लिए कितना खतरनाक है?
पाला तब पड़ता है जब:
- तापमान 0°C या उससे नीचे चला जाए
- हवा में नमी अधिक हो
- आसमान साफ हो
इस स्थिति में पौधों की सतह पर जमी नमी बर्फ में बदल जाती है और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, जिससे पौधे झुलस जाते हैं।
राजस्थान में किन फसलों को सबसे ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, पाले से सबसे ज्यादा नुकसान इन फसलों को होता है:
- सरसों
- चना
- जीरा
- आलू
- मटर
- टमाटर
- फूलों की खेती
खासतौर पर शेखावाटी, नागौर, बीकानेर, चूरू और झुंझुनूं जिलों में किसानों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
फसलों पर पाले का संभावित असर (तालिका)
| फसल | खतरे का स्तर |
|---|---|
| सरसों | बहुत अधिक |
| चना | अधिक |
| जीरा | अत्यधिक |
| आलू | बहुत अधिक |
| मटर | अधिक |
| टमाटर | अत्यधिक |
| फूल | बहुत अधिक |
कृषि विभाग की किसानों को विशेष सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को पाले और ओलावृष्टि से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं:
- खेतों में रात के समय हल्की सिंचाई करें
- फसलों पर धुआं करने की व्यवस्था करें
- पॉलीथीन शीट या मल्चिंग का उपयोग करें
- सब्जी और फूलों की फसलों को ढककर रखें
- ओलावृष्टि की स्थिति में तुरंत बीमा कंपनी और कृषि विभाग को सूचना दें
ओलावृष्टि से कितना नुकसान हो सकता है?
ओलावृष्टि कुछ ही मिनटों में:
- खड़ी फसलों को जमीन पर गिरा सकती है
- फूलों और फल वाली फसलों को पूरी तरह नष्ट कर सकती है
- गेहूं और सरसों की बालियों को तोड़ सकती है
- बागवानी फसलों में भारी नुकसान कर सकती है
इसलिए मौसम विभाग की चेतावनी को हल्के में लेना किसानों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
आम जनता पर ठंड का असर — स्वास्थ्य संकट बढ़ा
राजस्थान में चल रही शीतलहर के कारण अस्पतालों में:
- सर्दी-खांसी
- सांस की समस्या
- हार्ट पेशेंट्स में जटिलताएं
- बुजुर्गों में हाइपोथर्मिया
- बच्चों में निमोनिया जैसी शिकायतें
तेजी से बढ़ रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि:
- सुबह और देर रात घर से निकलने से बचें
- गर्म कपड़े पहनें
- ठंडी हवा से सीधा संपर्क न रखें
- पर्याप्त गर्म तरल पदार्थ लें
पशुपालन पर भी भारी असर
ग्रामीण इलाकों में ठंड का सबसे ज्यादा असर पशुओं पर भी पड़ा है।
पशुपालकों के अनुसार:
- दूध उत्पादन में गिरावट
- नवजात पशुओं में संक्रमण
- ठंड से पशुओं की मृत्यु का खतरा
बढ़ गया है।
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को पशुओं को ढके हुए स्थानों में रखने और सूखा चारा देने की सलाह दी है।
सड़क और रेल यातायात पर असर
घने कोहरे और पाले के कारण:
- सुबह के समय हाईवे पर दृश्यता बेहद कम
- कई जगह वाहन रेंगते नजर आए
- कुछ ट्रेनें देरी से चलीं
- ग्रामीण सड़कों पर फिसलन बढ़ गई
पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि:
- रात और सुबह के समय अनावश्यक यात्रा न करें
- वाहन धीमी गति से चलाएं
- फॉग लाइट का इस्तेमाल करें
पश्चिमी विक्षोभ के बाद लौट सकता है घना कोहरा — क्यों?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब बारिश होती है:
- वातावरण में नमी बढ़ती है
- जमीन गीली हो जाती है
- रात में तापमान गिरने पर यह नमी कोहरे में बदल जाती है
इसलिए संभावना जताई जा रही है कि 28 जनवरी के बाद राजस्थान में फिर से घना कोहरा लौट सकता है, खासकर उत्तर-पूर्वी जिलों में।
अगले 72 घंटों का विस्तृत मौसम आउटलुक
26 जनवरी:
- सुबह: मौसम शुष्क
- दोपहर/शाम: पश्चिमी राजस्थान में बादल
- रात: ठंड बनी रहेगी
27 जनवरी:
- अधिकांश संभागों में बारिश
- कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि
- तेज हवाएं 30–40 किमी/घंटा
28 जनवरी:
- बारिश थमने की संभावना
- तापमान में 2–4 डिग्री की बढ़ोतरी
- सुबह घना कोहरा संभव
26–28 जनवरी का संभावित मौसम प्रभाव (तालिका)
| दिन | तापमान रुझान | वर्षा संभावना | कोहरा | ओले |
|---|---|---|---|---|
| 26 जनवरी | स्थिर ठंड | कम | मध्यम | नहीं |
| 27 जनवरी | बढ़ोतरी शुरू | अधिक | कम | संभव |
| 28 जनवरी | हल्की राहत | कम | अधिक | नहीं |
मौसम विभाग का अलर्ट लेवल
मौसम विभाग ने:
- नागौर, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, बीकानेर में ऑरेंज अलर्ट
- जयपुर, अजमेर, अलवर, भरतपुर में येलो अलर्ट
जारी किया है।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है:
“राजस्थान में यह ठंड सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि यह कई वर्षों बाद आया गंभीर शीतलहर चरण है। पश्चिमी विक्षोभ से कुछ राहत मिलेगी, लेकिन इसके बाद फिर से ठंड और कोहरे की वापसी संभव है।”
गणतंत्र दिवस समारोहों पर भी पड़ेगा असर
26 जनवरी को आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों पर मौसम का असर देखने को मिल सकता है:
- सुबह ठंड और कोहरा
- दोपहर बाद कुछ क्षेत्रों में बादल
- शाम तक पश्चिमी राजस्थान में बारिश की संभावना
प्रशासन ने कार्यक्रम आयोजकों को मौसम के अनुसार व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं।
क्यों कहा जा रहा है इसे “जहरीली ठंड”?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस ठंड को “जहरीली” इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि:
- यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरा बन रही है
- पाले से फसलें बर्बाद हो रही हैं
- सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है
- बुजुर्गों और बच्चों के लिए जोखिम बढ़ा है
यानी यह ठंड अब सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा संकट बन चुकी है।
प्रशासन की आम जनता से अपील
राज्य प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि:
- अनावश्यक यात्रा से बचें
- गर्म कपड़े और कंबल का उपयोग करें
- खुले में सोने से बचें
- कमजोर वर्ग और बुजुर्गों की मदद करें
- मौसम अलर्ट का पालन करें
निष्कर्ष: राहत आने वाली है, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं
राजस्थान इस समय अपने सबसे कठिन शीतकालीन दौर से गुजर रहा है। नागौर में -1.3°C जैसी स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि यह ठंड अब सामान्य नहीं रही। हालांकि 26–27 जनवरी को आने वाला पश्चिमी विक्षोभ तापमान में कुछ राहत देगा, लेकिन इसके साथ बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि जैसे नए खतरे भी लेकर आएगा।
किसानों, यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों — सभी के लिए अगले 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। सतर्कता, सावधानी और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन ही इस मौसम संकट से सुरक्षित निकलने का एकमात्र रास्ता है।
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