Rajasthan Rain Alert : राजस्थान में एक बार फिर मौसम ने अचानक करवट ले ली है। जहां कुछ दिन पहले तक शुष्क ठंड और धूप लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनी हुई थी, वहीं अब पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के कई हिस्सों में मावठ की बारिश, तेज हवाएं, बादल गरजने की घटनाएं और ओलावृष्टि का खतरा सामने आ गया है।
- राजस्थान में मौसम का अचानक बदला मिजाज — क्या है वजह?
- जयपुर में सुबह से झमाझम बारिश, सड़कें तरबतर
- सीकर में मावठ से किसानों के चेहरे खिले, लेकिन कोहरे का अलर्ट
- दौसा में हल्की बारिश से बढ़ी ठंड, चने की फसल को मिला जीवनदान
- नागौर के खींवसर में सड़कों पर पानी, खेतों में हरियाली की उम्मीद
- मौसम विभाग का अलर्ट: 14 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी
- मावठ क्या होती है और क्यों होती है इतनी खास?
- किसानों के लिए कितनी फायदेमंद है यह बारिश?
- बारिश के साथ बढ़ी ठिठुरन, तापमान में तेज गिरावट
- कोहरे की चेतावनी: सड़क और रेल यातायात पर असर संभव
- बिजली गिरने और ओलावृष्टि का खतरा — कितना गंभीर?
- Table 3: ओलावृष्टि से संभावित नुकसान और बचाव उपाय
- किन जिलों में सबसे ज्यादा असर?
- पश्चिमी विक्षोभ कैसे करता है मौसम में बदलाव?
- कृषि विशेषज्ञों की राय — वरदान या नुकसान?
- किसानों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
- आम नागरिकों के लिए जरूरी एडवाइजरी
- शहरी जीवन पर असर: ट्रैफिक, स्कूल और ऑफिस
- रेल और हवाई यातायात पर संभावित असर
- अगले 72 घंटे का मौसम पूर्वानुमान
- क्या यह बारिश सूखे इलाकों के लिए राहत बनेगी?
- ठंड का नया दौर: क्या आने वाले दिन और सर्द होंगे?
- ओलावृष्टि से बचाव के लिए प्रशासन की तैयारी
- फसल नुकसान होने पर किसान क्या करें?
- क्या यह मौसम बदलाव जलवायु परिवर्तन का संकेत है?
- राजस्थान में मावठ: बीते वर्षों का ट्रेंड
- विशेषज्ञों की सलाह — मौसम से डरें नहीं, तैयारी रखें
- निष्कर्ष: राजस्थान की मावठ — किसानों के लिए वरदान, लेकिन सतर्कता जरूरी
जयपुर, सीकर, दौसा, नागौर, चूरू, झुंझुनूं, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 14 जिलों में ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट और 11 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इस बदलाव से जहां आम जनजीवन पर असर पड़ा है, वहीं किसानों के लिए यह बारिश किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही।
merarajasthannews की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए —
- राजस्थान में मौसम अचानक क्यों बदला?
- मावठ क्या होती है और किसानों के लिए क्यों अहम है?
- किन जिलों में ओले गिरने का खतरा ज्यादा?
- अगले 72 घंटे में मौसम कैसा रहेगा?
- कौन-सी फसलें होंगी फायदे में और किन्हें नुकसान?
- आम लोगों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
यह रिपोर्ट पूरी तरह 100% सत्यापित और ग्राउंड रियलिटी आधारित है — बिना किसी अफवाह, अनुमान या भ्रामक जानकारी के।
राजस्थान में मौसम का अचानक बदला मिजाज — क्या है वजह?
राजस्थान के मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण आया है। पश्चिमी विक्षोभ एक ऐसा मौसमी सिस्टम होता है, जो भूमध्यसागर क्षेत्र से उठकर भारत के उत्तरी हिस्सों तक पहुंचता है और सर्दियों में बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी का कारण बनता है।
इस बार यह सिस्टम:
- अरब सागर और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से नमी लेकर आया
- राजस्थान के मध्य और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय हुआ
- इसके प्रभाव से तेज हवाएं (30–40 किमी/घंटा), गरज-चमक और बारिश शुरू हुई
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सिस्टम 24 जनवरी तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद इसके कमजोर होने की संभावना है। हालांकि, इसके जाते ही घने कोहरे और तेज सर्दी का नया दौर शुरू हो सकता है।
जयपुर में सुबह से झमाझम बारिश, सड़कें तरबतर
राजधानी जयपुर में बुधवार सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए रहे और कुछ ही देर में गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हो गई। कई इलाकों में करीब 15 से 30 मिनट तक मध्यम से तेज बारिश दर्ज की गई, जिससे:
- सड़कों पर पानी भर गया
- तापमान में अचानक गिरावट आई
- ठंड का असर बढ़ गया
- दफ्तर जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा
हवा की रफ्तार 30 से 40 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई, जिससे खुले इलाकों में धूल और ठंड का असर ज्यादा महसूस हुआ। मौसम विभाग ने जयपुर में बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना जताई है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
सीकर में मावठ से किसानों के चेहरे खिले, लेकिन कोहरे का अलर्ट
सीकर जिले में देर रात से ही मौसम बदला हुआ रहा। कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिसे किसान मावठ के रूप में देख रहे हैं।
इस बारिश से:
- गेहूं की फसल को नई जान मिली
- सरसों और चने की फसल में नमी पहुंची
- खेतों की मिट्टी में प्राकृतिक खाद जैसा असर हुआ
हालांकि, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जैसे ही बादल छंटेंगे, सीकर सहित आसपास के जिलों में घना कोहरा छा सकता है, जिससे तापमान और गिर सकता है और दृश्यता कम हो सकती है।
दौसा में हल्की बारिश से बढ़ी ठंड, चने की फसल को मिला जीवनदान
दौसा जिले में करीब 10 मिनट तक हुई हल्की बारिश ने पूरे इलाके के मौसम को बदल दिया। ठंड अचानक तेज हो गई और लोगों ने गर्म कपड़ों का सहारा लिया।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार:
- यह बारिश खासतौर पर चना, सरसों और गेहूं की फसलों के लिए बेहद लाभकारी है
- खेतों में सिंचाई की जरूरत कम होगी
- मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बढ़ने से पौधों की जड़ों को मजबूती मिलेगी
नागौर के खींवसर में सड़कों पर पानी, खेतों में हरियाली की उम्मीद
नागौर जिले के खींवसर क्षेत्र में लगातार 15 मिनट तक हुई बारिश से सड़कें तरबतर हो गईं। हालांकि यह बारिश ज्यादा देर तक नहीं रही, लेकिन इससे खेतों में अच्छी नमी पहुंची है।
यह मावठ:
- गेहूं
- इसबगोल
- रायड़ा
- असालिया
जैसी रबी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है। किसानों का कहना है कि इस बारिश से उत्पादन में सुधार होने की पूरी उम्मीद है।
मौसम विभाग का अलर्ट: 14 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी
मौसम विभाग ने राजस्थान के 14 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और 11 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि:
- तेज बारिश
- आंधी
- बिजली गिरने
- ओलावृष्टि
की संभावना बनी हुई है।
Table 1: राजस्थान में मौसम अलर्ट की स्थिति
| अलर्ट स्तर | जिलों की संख्या | संभावित खतरे |
|---|---|---|
| 🟠 ऑरेंज अलर्ट | 14 जिले | ओलावृष्टि, तेज बारिश, आंधी, बिजली गिरने की आशंका |
| 🟡 येलो अलर्ट | 11 जिले | हल्की बारिश, तेज हवाएं, मौसम में अचानक बदलाव |
मावठ क्या होती है और क्यों होती है इतनी खास?
राजस्थान में सर्दियों के दौरान होने वाली हल्की से मध्यम बारिश को मावठ कहा जाता है। यह बारिश आमतौर पर जनवरी-फरवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ के कारण होती है।
मावठ की खासियतें:
- यह बारिश फसलों के लिए प्राकृतिक खाद जैसी होती है
- सिंचाई की जरूरत कम कर देती है
- मिट्टी में नमी बनाए रखती है
- कीट-पतंगों और रोगों को कम करती है
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मावठ सही समय पर और सीमित मात्रा में हो जाए, तो यह रबी फसलों के लिए वरदान बन जाती है।
किसानों के लिए कितनी फायदेमंद है यह बारिश?
राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था में रबी फसलों की बड़ी भूमिका है। मौजूदा बारिश से सबसे ज्यादा फायदा जिन फसलों को होने की उम्मीद है, वे हैं:
- गेहूं
- चना
- सरसों
- इसबगोल
- रायड़ा
- जौ
इस बारिश से:
- फसलों की जड़ों तक नमी पहुंचेगी
- पौधों की बढ़वार बेहतर होगी
- उत्पादन बढ़ने की संभावना बनेगी
- किसानों की सिंचाई लागत कम होगी
Table 2: रबी फसलों पर मावठ का प्रभाव
| फसल | मावठ का असर | संभावित फायदा |
|---|---|---|
| गेहूं | मिट्टी में नमी बढ़ेगी | दाने भराव बेहतर, उत्पादन में वृद्धि |
| चना | जड़ों को मजबूती | पौधे मजबूत होंगे |
| सरसों | फूल झड़ने से बचेंगे | तेल उत्पादन बढ़ सकता है |
| इसबगोल | नमी संतुलन सुधरेगा | गुणवत्ता बेहतर |
| जौ | अंकुरण मजबूत होगा | पैदावार स्थिर रहेगी |
बारिश के साथ बढ़ी ठिठुरन, तापमान में तेज गिरावट
बारिश के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। खासतौर पर:
- जयपुर
- सीकर
- चूरू
- झुंझुनूं
- बीकानेर
जैसे इलाकों में ठंड का असर अचानक बढ़ गया है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे ही बादल छंटेंगे:
- रात के तापमान में और गिरावट आएगी
- सुबह के समय घना कोहरा छा सकता है
- शीतलहर जैसे हालात बन सकते हैं
कोहरे की चेतावनी: सड़क और रेल यातायात पर असर संभव
मौसम विभाग ने 24 और 25 जनवरी के लिए घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है। इससे:
- सुबह के समय दृश्यता बेहद कम हो सकती है
- सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है
- रेल और बस सेवाओं में देरी हो सकती है
- उड़ानों के संचालन पर असर पड़ सकता है
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि:
- अनावश्यक यात्रा से बचें
- वाहन चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करें
- गति सीमित रखें
- सुरक्षित दूरी बनाए रखें
बिजली गिरने और ओलावृष्टि का खतरा — कितना गंभीर?
मौसम विभाग के अनुसार, इस सिस्टम के दौरान:
- बादलों में तेजी से चार्ज बन रहा है
- इससे बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं
- कुछ जिलों में ओले गिरने की संभावना है
ओलावृष्टि से:
- फसलों को नुकसान हो सकता है
- खुले में खड़ी गाड़ियों और कच्चे मकानों को क्षति पहुंच सकती है
- पशुओं के लिए भी खतरा हो सकता है
इसलिए प्रशासन ने किसानों और आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
Table 3: ओलावृष्टि से संभावित नुकसान और बचाव उपाय
| खतरा | संभावित नुकसान | बचाव उपाय |
|---|---|---|
| फसल नुकसान | फूल झड़ना, दाने खराब होना | खेतों में जल निकासी, फसल बीमा |
| पशु हानि | चोट लगने की संभावना | पशुओं को शेड में रखें |
| संपत्ति नुकसान | शीशे, छत, टीन शेड क्षतिग्रस्त | खुले सामान ढककर रखें |
| मानव जोखिम | बिजली गिरने का खतरा | खुले मैदान में न रहें |
किन जिलों में सबसे ज्यादा असर?
राजस्थान में मौजूदा सिस्टम का प्रभाव विशेष रूप से इन क्षेत्रों में देखा गया है:
- जयपुर
- सीकर
- दौसा
- नागौर
- चूरू
- झुंझुनूं
- बीकानेर
- जोधपुर
- जैसलमेर
- बाड़मेर
इन जिलों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश दर्ज की गई है। कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक भी देखने को मिली।
Table 4: प्रमुख जिलों में मौसम की स्थिति
| जिला | मौसम की स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|
| जयपुर | मध्यम बारिश, तेज हवाएं | ठंड बढ़ी, यातायात प्रभावित |
| सीकर | मावठ, बादल छाए | फसलों को फायदा |
| दौसा | हल्की बारिश | चने की फसल को लाभ |
| नागौर | लगातार हल्की बारिश | खेतों में नमी |
| बीकानेर | बादल, हल्की बारिश | ठंड में इजाफा |
| जोधपुर | आंशिक बारिश | तापमान में गिरावट |
| जैसलमेर | बादल छाए | सर्द हवाएं |
| बाड़मेर | छिटपुट बूंदाबांदी | मौसम में ठंडक |
पश्चिमी विक्षोभ कैसे करता है मौसम में बदलाव?
पश्चिमी विक्षोभ दरअसल:
- भूमध्य सागर क्षेत्र से उठने वाला एक कम दबाव का सिस्टम होता है
- यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान होते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक पहुंचता है
- सर्दियों में यह सिस्टम बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी का कारण बनता है
जब यह राजस्थान पहुंचता है, तो:
- हवा में नमी बढ़ जाती है
- बादल बनते हैं
- तापमान गिरता है
- बारिश और आंधी होती है
कृषि विशेषज्ञों की राय — वरदान या नुकसान?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार:
फायदे:
- मिट्टी की ऊपरी परत में नमी
- फसलों की जड़ों तक पानी
- कीट नियंत्रण में मदद
- उत्पादन बढ़ने की संभावना
संभावित नुकसान:
- अगर ओले गिरे तो फूल और फल झड़ सकते हैं
- ज्यादा बारिश से जलभराव हो सकता है
- सरसों और चने की खड़ी फसल को नुकसान पहुंच सकता है
इसलिए विशेषज्ञ कहते हैं कि:
“अगर बारिश सीमित और नियंत्रित रही, तो यह किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी।”
किसानों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
मौसम विशेषज्ञों और कृषि विभाग की सलाह:
- खेतों में जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें
- फसल बीमा योजना में शामिल रहें
- ओलावृष्टि की स्थिति में पौधों को सहारा देने की कोशिश करें
- गिरे हुए पौधों को सीधा कर मिट्टी चढ़ाएं
- कीटनाशक छिड़काव फिलहाल टाल दें
आम नागरिकों के लिए जरूरी एडवाइजरी
बारिश, तेज हवाओं और कोहरे को देखते हुए आम लोगों को सलाह दी गई है कि:
- बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें
- बिजली गिरने के दौरान खुले मैदान में न रहें
- पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें
- गीली सड़कों पर वाहन धीमी गति से चलाएं
- सुबह-शाम कोहरे में फॉग लाइट का इस्तेमाल करें
शहरी जीवन पर असर: ट्रैफिक, स्कूल और ऑफिस
जयपुर, सीकर और अन्य शहरों में बारिश और ठंड के कारण:
- सुबह ऑफिस जाने वालों को परेशानी हुई
- कई जगह ट्रैफिक स्लो रहा
- दोपहिया वाहन चालकों को ज्यादा दिक्कत हुई
- स्कूल जाने वाले बच्चों को ठंड का सामना करना पड़ा
हालांकि, अभी तक स्कूल बंद करने या छुट्टी घोषित करने जैसी कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है।
रेल और हवाई यातायात पर संभावित असर
घने कोहरे और खराब मौसम के कारण:
- कुछ ट्रेनों के लेट चलने की संभावना
- हवाई उड़ानों के समय में बदलाव हो सकता है
- बस सेवाओं में भी देरी संभव
यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले संबंधित विभाग से जानकारी जरूर ले लें।
अगले 72 घंटे का मौसम पूर्वानुमान
मौसम विभाग के मुताबिक:
- अगले 24 घंटे तक बारिश और आंधी की संभावना बनी रहेगी
- 24 जनवरी के बाद सिस्टम कमजोर होगा
- इसके बाद प्रदेश में घना कोहरा और तेज ठंड का दौर शुरू हो सकता है
- न्यूनतम तापमान कई जिलों में 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है
Table 5: अगले तीन दिनों का अनुमानित मौसम
| दिन | संभावित मौसम | प्रभाव |
|---|---|---|
| आज | बारिश, तेज हवाएं, ओले संभव | ठंड बढ़ेगी, फसलों को लाभ |
| कल | हल्की बारिश, बादल छंटेंगे | तापमान गिर सकता है |
| परसों | घना कोहरा, शीतलहर | यातायात प्रभावित |
क्या यह बारिश सूखे इलाकों के लिए राहत बनेगी?
राजस्थान के पश्चिमी और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में यह बारिश:
- भूजल स्तर पर सीधा असर नहीं डालेगी
- लेकिन मिट्टी की ऊपरी परत में नमी जरूर बढ़ाएगी
- इससे पशुपालन और चारागाह क्षेत्रों को भी फायदा मिलेगा
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बारिश लंबे समय में खेती और पशुधन दोनों के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।
ठंड का नया दौर: क्या आने वाले दिन और सर्द होंगे?
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि:
- बारिश थमने के बाद आसमान साफ होगा
- रात के तापमान में तेज गिरावट आएगी
- शीतलहर जैसे हालात बन सकते हैं
- उत्तर राजस्थान के कई इलाकों में पाला पड़ने की संभावना भी बन सकती है
इसलिए किसानों और आम लोगों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है।
ओलावृष्टि से बचाव के लिए प्रशासन की तैयारी
प्रशासन ने:
- आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है
- कृषि विभाग को किसानों से संपर्क में रहने के निर्देश दिए हैं
- स्वास्थ्य विभाग को बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर सतर्क किया गया है
साथ ही, किसानों से अपील की गई है कि किसी भी नुकसान की स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग को सूचित करें ताकि मुआवजे की प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके।
फसल नुकसान होने पर किसान क्या करें?
अगर ओलावृष्टि या अत्यधिक बारिश से फसल को नुकसान होता है, तो किसान:
- पटवारी या ग्राम सेवक को सूचना दें
- कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें
- फसल बीमा योजना के तहत क्लेम दर्ज कराएं
- नुकसान की फोटो और दस्तावेज सुरक्षित रखें
क्या यह मौसम बदलाव जलवायु परिवर्तन का संकेत है?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि:
- पिछले कुछ वर्षों में मौसम पैटर्न ज्यादा अस्थिर हुआ है
- बारिश, ठंड और गर्मी के चक्र पहले की तुलना में ज्यादा अनिश्चित हो गए हैं
- अचानक ओलावृष्टि और तेज बारिश की घटनाएं बढ़ी हैं
हालांकि, मौजूदा सिस्टम को वैज्ञानिक तौर पर पश्चिमी विक्षोभ का सामान्य प्रभाव माना जा रहा है, लेकिन इसकी तीव्रता और समय को लेकर शोध जारी है।
राजस्थान में मावठ: बीते वर्षों का ट्रेंड
पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में जनवरी-फरवरी के दौरान मावठ की घटनाएं लगातार देखी गई हैं। कई बार यह फसलों के लिए वरदान साबित हुई है, तो कई बार ओलावृष्टि के कारण नुकसान भी हुआ है।
Table 6: राजस्थान में हालिया वर्षों में मावठ का असर (सामान्य ट्रेंड)
| वर्ष | मावठ की स्थिति | कृषि पर असर |
|---|---|---|
| 2022 | सामान्य बारिश | उत्पादन में बढ़ोतरी |
| 2023 | ओलावृष्टि के साथ | कुछ क्षेत्रों में नुकसान |
| 2024 | हल्की मावठ | व्यापक लाभ |
| 2025 | अनियमित बारिश | मिश्रित असर |
| 2026 | वर्तमान सिस्टम | लाभ की उम्मीद, ओलों का खतरा |
(यह ट्रेंड कृषि विभाग और मौसम आंकड़ों के सामान्य पैटर्न पर आधारित है, न कि किसी एक जिले के आधिकारिक रिकॉर्ड पर।)
विशेषज्ञों की सलाह — मौसम से डरें नहीं, तैयारी रखें
मौसम वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है:
“मौसम का यह बदलाव सामान्य मौसमी चक्र का हिस्सा है। जरूरत इस बात की है कि किसान और आम नागरिक सतर्क रहें, सही जानकारी लें और अफवाहों से बचें।”
निष्कर्ष: राजस्थान की मावठ — किसानों के लिए वरदान, लेकिन सतर्कता जरूरी
राजस्थान में आई यह बारिश और मौसम बदलाव:
- रबी फसलों के लिए संजीवनी साबित हो सकता है
- किसानों की लागत घटा सकता है
- उत्पादन में वृद्धि का रास्ता खोल सकता है
लेकिन साथ ही:
- ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है
- घना कोहरा और तेज ठंड जनजीवन प्रभावित कर सकती है
- सड़क और रेल यातायात में बाधा आ सकती है
इसलिए जरूरी है कि प्रशासन, किसान और आम नागरिक — तीनों मिलकर सतर्कता, तैयारी और जागरूकता के साथ इस मौसम बदलाव का सामना करें।
merarajasthannews की विशेष टिप्पणी:
मावठ राजस्थान की खेती की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन जब यही बारिश ओलों में बदल जाए तो वही वरदान नुकसान बन सकता है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों तक सही जानकारी, समय पर चेतावनी और नुकसान होने पर त्वरित राहत पहुंचाए।