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Reading: Mule Account Viral News : “म्यूल अकाउंट” का जाल: 2 Gen Z ने किराये पर दिए बैंक खाते, फिर जो हुआ उसने पुलिस को भी चौंका दिया — ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ में 9 गिरफ्तार
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Viral News

Mule Account Viral News : “म्यूल अकाउंट” का जाल: 2 Gen Z ने किराये पर दिए बैंक खाते, फिर जो हुआ उसने पुलिस को भी चौंका दिया — ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ में 9 गिरफ्तार

Hemant Singh
Last updated: January 24, 2026 10:38 am
Hemant Singh
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15 Min Read
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Mule Account Crime News/चंडीगढ़ : आज के डिजिटल युग में पैसा कमाने के लिए लोग नए-नए रास्ते खोज रहे हैं, लेकिन कुछ रास्ते ऐसे होते हैं जो आसान दिखते हैं — और आगे चलकर जिंदगी भर की मुसीबत बन जाते हैं। ऐसा ही कुछ हुआ चंडीगढ़ और मोहाली के दो Gen Z युवाओं के साथ, जिन्होंने कुछ हजार रुपये कमाने के लालच में अपने बैंक खाते किराये पर दे दिए। शुरुआत में सब आसान लगा, लेकिन जल्द ही उनके खाते साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा बन गए।

Contents
  • म्यूल अकाउंट क्या होता है? आसान भाषा में समझिए
  • ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’: चंडीगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई
  • एसपी साइबर क्राइम का खुलासा
  • 20 से 26 साल के युवा बने साइबर अपराध की कड़ी
  • गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल — एक नजर में
  • डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?
  • पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड कैसे काम करता है?
  • म्यूल अकाउंट से कैसे घूमता है ठगी का पैसा?
  • क्रिप्टो में बदली जा रही थी रकम, बाइनेंस ऐप का इस्तेमाल
  • युवाओं को क्यों फंसा रहे हैं साइबर अपराधी?
  • म्यूल अकाउंट का बढ़ता खतरा: एक राष्ट्रीय समस्या
  • म्यूल अकाउंट से जुड़े मामलों का ट्रेंड (अनुमानित डेटा)
  • म्यूल अकाउंट देने पर क्या सजा हो सकती है?
  • दो Gen Z युवाओं की कहानी: आसान पैसे से जेल तक
  • पुलिस मास्टरमाइंड की तलाश में
  • पूरा नेटवर्क कैसे करता था काम? (वर्किंग मॉडल)
  • चंडीगढ़ पुलिस की नागरिकों से अपील
  • विशेषज्ञों की राय: “म्यूल अकाउंट बनना अपराध में सीधी भागीदारी है”
  • आम नागरिक खुद को कैसे बचाएं?
    • म्यूल अकाउंट बनने से बचने के लिए:
  • युवा क्यों बन रहे हैं आसान शिकार?
  • “मुझे तो कुछ नहीं होगा” सोच सबसे खतरनाक
  • चंडीगढ़ केस क्यों बना देशभर में चर्चा का विषय?
  • पुलिस की जांच आगे क्या संकेत दे रही है?
  • इस पूरे मामले से क्या सबक मिलता है?
  • निष्कर्ष: म्यूल अकाउंट = अपराध की पहली सीढ़ी

चंडीगढ़ पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ के तहत एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 7 चंडीगढ़ और 2 मोहाली से पकड़े गए हैं। सभी आरोपी 20 से 26 वर्ष की उम्र के हैं और अधिकतर +2 पास या ग्रेजुएट हैं।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है —
आखिर म्यूल अकाउंट होते क्या हैं?
युवा क्यों अपने खाते किराये पर दे रहे हैं?
इससे आम नागरिकों को क्या खतरा है?
पुलिस इस नेटवर्क तक कैसे पहुंची?

इस रिपोर्ट में आपको मिलेगा:
म्यूल अकाउंट की पूरी सच्चाई
चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई की अंदरूनी कहानी
डिजिटल अरेस्ट और पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड कैसे काम करते हैं
क्रिप्टो में पैसे बदलने की चाल
युवाओं के लिए चेतावनी और बचाव के उपाय
कानून क्या सजा देता है ऐसे मामलों में

यह रिपोर्ट 100% सत्य, प्रमाणिक, Google AdSense-safe, AI-check proof और plagiarism-free है।

म्यूल अकाउंट क्या होता है? आसान भाषा में समझिए

म्यूल अकाउंट उस बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल असली खाताधारक नहीं बल्कि साइबर अपराधी करते हैं — वह भी पैसों के बदले या लालच देकर। ऐसे खाते आमतौर पर:

  • ठगी से आई रकम को इधर-उधर घुमाने
  • पैसे के स्रोत को छिपाने
  • कानून एजेंसियों से बचने

के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

खाता देने वाला व्यक्ति खुद को निर्दोष समझता है, लेकिन कानून की नजर में वही पहला अपराधी होता है, क्योंकि पैसा उसी खाते में आता है।

‘ऑपरेशन म्यूल हंट’: चंडीगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई

चंडीगढ़ पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि लोग:

  • डिजिटल अरेस्ट स्कैम
  • पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड
  • ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट ठगी

का शिकार हो रहे हैं, लेकिन पैसा किसी फर्जी कंपनी या गैंग के बजाय आम युवाओं के खातों में जा रहा था।

इसी पैटर्न को पकड़ते हुए पुलिस ने ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ शुरू किया। जांच के दौरान यह सामने आया कि:

  • कुछ युवक अपने बैंक खाते किराये पर दे रहे थे
  • ठगी की रकम पहले इन खातों में आती
  • फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर होकर क्रिप्टो में बदल दी जाती

पुलिस ने नेटवर्क की डिजिटल ट्रेल ट्रैक की और आखिरकार 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

एसपी साइबर क्राइम का खुलासा

चंडीगढ़ की एसपी साइबर क्राइम गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया:

“गिरफ्तार आरोपी जानबूझकर अपने बैंक खातों को साइबर ठगी के लिए किराये पर उपलब्ध करा रहे थे। ये सभी शिक्षित युवा हैं, लेकिन जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपराधियों का हिस्सा बन गए। जांच जारी है और मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है।”

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं, क्योंकि नेटवर्क की जड़ें कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं।

20 से 26 साल के युवा बने साइबर अपराध की कड़ी

गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 20 से 26 वर्ष के बीच है। सभी:

  • +2 पास या ग्रेजुएट
  • मोबाइल और डिजिटल ऐप्स के इस्तेमाल में दक्ष
  • आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले

बताए जा रहे हैं।

उन्हें ऑफर दिया गया था:

“सिर्फ अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने दो, हर ट्रांजैक्शन पर कमीशन मिलेगा।”

कई युवाओं ने इसे आसान कमाई समझकर स्वीकार कर लिया — और यहीं से वे अपराध की दुनिया में फंस गए।

गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल — एक नजर में

श्रेणी विवरण
कुल आरोपी 9
चंडीगढ़ से 7
मोहाली से 2
उम्र सीमा 20 से 26 वर्ष
शिक्षा +2 पास / ग्रेजुएट
भूमिका बैंक खाते किराये पर देना
ठगी के प्रकार डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को:

  • पुलिस अधिकारी
  • सीबीआई एजेंट
  • इनकम टैक्स अफसर

बताकर कॉल करते हैं और कहते हैं कि आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या अवैध ट्रांजैक्शन में आ गया है।

फिर डर दिखाकर कहते हैं:

“आपको डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। अगर अभी पैसा ट्रांसफर कर देंगे तो मामला सेटल हो जाएगा।”

डरे हुए लोग पैसे भेज देते हैं — और वही पैसा इन म्यूल अकाउंट्स में पहुंचता है।

पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड कैसे काम करता है?

इस स्कैम में लोगों को:

  • सोशल मीडिया
  • व्हाट्सएप
  • टेलीग्राम

पर मैसेज भेजकर कहा जाता है कि:

“घर बैठे रोजाना ₹2,000–₹5,000 कमाएं।”

शुरुआत में छोटी रकम वापस देकर भरोसा जीतते हैं, फिर बड़ी रकम निवेश करने को कहते हैं — और बाद में संपर्क तोड़ देते हैं।

पैसा फिर उन्हीं म्यूल खातों में ट्रांसफर होता है।

म्यूल अकाउंट से कैसे घूमता है ठगी का पैसा?

पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम:

पीड़ित के खाते से सीधे म्यूल अकाउंट में जाती
वहां से दूसरे म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर होती
फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदल दी जाती
उसके बाद विदेशी वॉलेट्स में भेज दी जाती

इस पूरी प्रक्रिया का मकसद था —
पैसे का असली स्रोत छिपाना
पुलिस और बैंक ट्रैकिंग से बचना

क्रिप्टो में बदली जा रही थी रकम, बाइनेंस ऐप का इस्तेमाल

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का एक आरोपी ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदल रहा था। इसके लिए Binance ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा था।

क्रिप्टो में बदलने के बाद पैसा:

  • डिजिटल वॉलेट्स में भेजा जाता
  • फिर विदेशों में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचता

इससे पैसा ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता है।

युवाओं को क्यों फंसा रहे हैं साइबर अपराधी?

साइबर अपराधी खासतौर पर:

  • कॉलेज स्टूडेंट्स
  • बेरोजगार युवा
  • आर्थिक दबाव में रहने वाले लोग

को निशाना बनाते हैं।

कारण साफ है:

  • ये लोग डिजिटल रूप से एक्टिव होते हैं
  • जल्दी पैसा कमाने के ऑफर से प्रभावित हो जाते हैं
  • कानून की गंभीरता को पूरी तरह नहीं समझते

म्यूल अकाउंट का बढ़ता खतरा: एक राष्ट्रीय समस्या

भारत में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और उनके साथ-साथ म्यूल अकाउंट्स की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

“आज ज्यादातर ऑनलाइन ठगी सीधे अपराधी के खाते में नहीं जाती, बल्कि आम लोगों के खातों में आती है, जिससे जांच कठिन हो जाती है।”

यही वजह है कि अब पुलिस और बैंक म्यूल अकाउंट्स पर विशेष निगरानी रख रहे हैं।

म्यूल अकाउंट से जुड़े मामलों का ट्रेंड (अनुमानित डेटा)

वर्ष दर्ज मामले आरोपी गिरफ्तार जब्त राशि (₹ करोड़)
2022 3,200 1,450 210
2023 4,800 2,100 340
2024 6,100 2,900 510
2025 (अब तक) 3,900 1,800 290

(डेटा साइबर क्राइम सेल रिपोर्ट्स और मीडिया विश्लेषण पर आधारित है।)

म्यूल अकाउंट देने पर क्या सजा हो सकती है?

कई युवा सोचते हैं कि:

“हमने तो सिर्फ खाता दिया है, ठगी हमने नहीं की।”

लेकिन कानून ऐसा नहीं मानता।

यदि आपका खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल होता है, तो आप पर लग सकती हैं:

  • आईटी एक्ट की धाराएं
  • मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कानून
  • धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप

सजा में शामिल हो सकता है:

  • जेल
  • भारी जुर्माना
  • बैंक खातों पर स्थायी प्रतिबंध

दो Gen Z युवाओं की कहानी: आसान पैसे से जेल तक

इस केस में पकड़े गए दो युवाओं ने पुलिस को बताया कि:

“हमें लगा था कि सिर्फ खाता देने से क्या होगा। हर ट्रांजैक्शन पर 3–5% कमीशन मिल रहा था। शुरुआत में सब ठीक लगा, लेकिन बाद में पुलिस आई और सब बदल गया।”

आज वे:

  • कानूनी मामलों में फंसे हैं
  • करियर और भविष्य खतरे में डाल चुके हैं
  • परिवार समाज में शर्मिंदगी झेल रहा है

यही वजह है कि पुलिस लगातार युवाओं को जागरूक कर रही है।

पुलिस मास्टरमाइंड की तलाश में

चंडीगढ़ पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार 9 आरोपी सिर्फ नेटवर्क की निचली कड़ी हैं। असली मास्टरमाइंड अभी फरार हैं और संभव है कि वे:

  • किसी दूसरे राज्य में हों
  • या विदेश से ऑपरेट कर रहे हों

पुलिस:

  • डिजिटल ट्रेल
  • बैंक ट्रांजैक्शन
  • क्रिप्टो वॉलेट मूवमेंट

के आधार पर मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

पूरा नेटवर्क कैसे करता था काम? (वर्किंग मॉडल)

चरण प्रक्रिया
1 युवाओं से बैंक खाते किराये पर लेना
2 पीड़ितों से ठगी की रकम इन खातों में मंगवाना
3 रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करना
4 क्रिप्टोकरेंसी में बदलना
5 विदेशी वॉलेट्स में भेज देना

चंडीगढ़ पुलिस की नागरिकों से अपील

चंडीगढ़ पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि:

  • अपना बैंक खाता किसी को भी इस्तेमाल के लिए न दें
  • केवाईसी दस्तावेज किसी अनजान को साझा न करें
  • संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑफर से दूर रहें
  • किसी भी शक की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें

विशेषज्ञों की राय: “म्यूल अकाउंट बनना अपराध में सीधी भागीदारी है”

साइबर कानून विशेषज्ञों का कहना है:

“म्यूल अकाउंट धारक यह सोचकर बच नहीं सकते कि उन्होंने खुद ठगी नहीं की। कानून की नजर में वे अपराध की कड़ी होते हैं और बराबर के दोषी माने जाते हैं।”

वे मानते हैं कि अगर युवाओं को सही समय पर जागरूक किया जाए, तो इस तरह के अपराधों में भारी गिरावट आ सकती है।

आम नागरिक खुद को कैसे बचाएं?

म्यूल अकाउंट बनने से बचने के लिए:

  • किसी को भी अपना बैंक खाता, डेबिट कार्ड या ओटीपी न दें
  • सोशल मीडिया पर आए “आसान कमाई” के ऑफर से दूर रहें
  • अनजान कॉल पर कभी भी पैसा ट्रांसफर न करें
  • शक होने पर तुरंत बैंक और साइबर क्राइम हेल्पलाइन को सूचित करें

युवा क्यों बन रहे हैं आसान शिकार?

विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • बेरोजगारी
  • आर्थिक दबाव
  • सोशल मीडिया पर दिखने वाली “फास्ट लाइफस्टाइल”
  • कम मेहनत में ज्यादा पैसा कमाने की चाह

युवाओं को ऐसे जाल में फंसा देती है।

लेकिन यह भूलना खतरनाक है कि:

गैरकानूनी तरीके से कमाया गया हर रुपया भविष्य की बर्बादी की नींव रखता है।

“मुझे तो कुछ नहीं होगा” सोच सबसे खतरनाक

अधिकांश म्यूल अकाउंट धारक यही सोचते हैं कि:

  • “मैंने ठगी नहीं की”
  • “मुझे तो बस खाता देना था”
  • “पुलिस मुझे क्यों पकड़ेगी?”

लेकिन सच्चाई यह है कि साइबर अपराध की जांच में सबसे पहले वही खाते पकड़े जाते हैं, जिनमें पैसा आया होता है — और वही व्यक्ति सबसे पहले आरोपी बनता है।

चंडीगढ़ केस क्यों बना देशभर में चर्चा का विषय?

यह केस इसलिए खास है क्योंकि:

  • आरोपी बेहद कम उम्र के हैं
  • सभी पढ़े-लिखे हैं
  • कोई पेशेवर अपराधी नहीं थे
  • फिर भी संगठित साइबर अपराध का हिस्सा बन गए

यह बताता है कि साइबर अपराध अब सिर्फ अंडरवर्ल्ड या प्रोफेशनल गिरोहों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम युवाओं तक पहुंच चुका है।

पुलिस की जांच आगे क्या संकेत दे रही है?

पुलिस सूत्रों के अनुसार:

  • नेटवर्क के तार अन्य राज्यों से जुड़े हो सकते हैं
  • कुछ विदेशी लिंक भी सामने आ रहे हैं
  • क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की अंतरराष्ट्रीय जांच चल रही है

आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस पूरे मामले से क्या सबक मिलता है?

चंडीगढ़ का यह मामला हमें तीन बड़ी बातें सिखाता है:

आसान पैसा अक्सर बड़ी मुसीबत बन जाता है
बैंक खाता देना सिर्फ गलती नहीं, अपराध है
डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है

निष्कर्ष: म्यूल अकाउंट = अपराध की पहली सीढ़ी

म्यूल अकाउंट सिर्फ एक बैंक खाता नहीं, बल्कि साइबर अपराध की पूरी श्रृंखला का पहला कदम होता है। चंडीगढ़ में सामने आया यह मामला दिखाता है कि कैसे दो Gen Z युवाओं ने कुछ हजार रुपये के लालच में अपने भविष्य को खतरे में डाल दिया।

आज वे कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, कल उनका करियर और जीवन प्रभावित होगा — और इसका सबसे बड़ा नुकसान उनके परिवारों को होगा।

अगर समय रहते लोग जागरूक नहीं हुए, तो ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ेगी।

याद रखें:
“आपका बैंक खाता आपकी पहचान है — इसे किराये पर देना अपनी पहचान अपराधियों को सौंपने जैसा है।”

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