Greater Noida News : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से आई यह खबर सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक ऐसे बेटे की आखिरी पुकार है, जिसने मौत से पहले अपने पिता से जिंदगी की भीख मांगी। 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार घने कोहरे में सड़क से फिसलकर 70 फीट गहरी पानी भरी खाई में गिर गई। डूबने से पहले युवराज ने अपने पिता को फोन किया और जो कहा, वह सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए।
“पापा, मैं पानी में गिर गया हूं… मैं डूब रहा हूं… प्लीज मुझे बचा लीजिए… मैं मरना नहीं चाहता…”
फोन पर बेटे की चीख सुनते ही पिता बदहवास हो गए और पुलिस के साथ घटनास्थल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
यह घटना शुक्रवार रात ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 क्षेत्र में हुई। युवराज मेहता अपनी कार से घर लौट रहे थे। पूरे इलाके में घना कोहरा छाया हुआ था और सड़क किनारे न तो रिफ्लेक्टर लगे थे और न ही गहरी नालियों को ढका गया था।
इसी दौरान उनकी कार सड़क की ऊंची मेड़ से टकराई और सीधे करीब 70 फीट गहरी पानी से भरी खाई में जा गिरी। आसपास मौजूद लोगों ने आवाज सुनी और मदद की कोशिश की, लेकिन कार तेजी से पानी में डूब चुकी थी।
डूबते वक्त पिता को लगाया आखिरी फोन
कार पानी में गिरते ही युवराज ने किसी तरह अपने मोबाइल से पिता राजकुमार मेहता को कॉल किया। फोन पर बेटे की घबराई आवाज सुन पिता की सांसें थम गईं।
आखिरी बातचीत के शब्द
| शब्द | भाव |
|---|---|
| “पापा…” | डर |
| “मैं पानी में गिर गया हूं…” | घबराहट |
| “मैं डूब रहा हूं…” | बेबसी |
| “प्लीज मुझे बचा लीजिए…” | आखिरी उम्मीद |
| “मैं मरना नहीं चाहता…” | जिंदगी की गुहार |
कुछ ही मिनटों में फोन कट गया — और इसके बाद बेटे की आवाज फिर कभी नहीं आई।
5 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, लेकिन नहीं बच सकी जान
स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस, गोताखोर और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम मौके पर पहुंची। करीब 5 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कार को पानी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक युवराज की मौत हो चुकी थी।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
पिता का फूटा दर्द — प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
बेटे की मौत से सदमे में डूबे पिता राजकुमार मेहता ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि:
- सड़क किनारे रिफ्लेक्टर नहीं लगे थे
- गहरी नालियां और खाइयां खुली छोड़ी गई थीं
- घने कोहरे में यह जानलेवा साबित हुआ
पिता ने कहा,
“अगर सड़क पर सही संकेतक और सुरक्षा इंतजाम होते, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता।”
पुलिस का बयान
नॉलेज पार्क थाना प्रभारी सर्वेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और विभागों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हादसे की बड़ी वजहें (Investigation Highlights)
| कारण | स्थिति |
|---|---|
| घना कोहरा | दृश्यता बेहद कम |
| सड़क पर रिफ्लेक्टर नहीं | ड्राइवर को अंदाजा नहीं लगा |
| खुली गहरी खाई | कार सीधे पानी में गिरी |
| देर से रेस्क्यू | जान नहीं बच सकी |
एक परिवार उजड़ गया, कई सवाल खड़े हो गए
यह हादसा सिर्फ एक युवक की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की चूक का आईना है। सवाल यह हैं:
- क्या सड़क सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है?
- क्या घने कोहरे वाले इलाकों में चेतावनी संकेत लगाए जाते हैं?
- क्या जानलेवा खाइयों और नालों को ढकना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक ऐसी दर्दनाक कहानियां दोहराती रहेंगी।
पूरा मामला एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| मृतक | युवराज मेहता (27), सॉफ्टवेयर इंजीनियर |
| स्थान | सेक्टर-150, ग्रेटर नोएडा |
| हादसा | कार 70 फीट गहरी पानी भरी खाई में गिरी |
| आखिरी कॉल | पिता को — “पापा, मैं मरना नहीं चाहता” |
| रेस्क्यू | पुलिस, गोताखोर, NDRF — 5 घंटे ऑपरेशन |
| परिवार का आरोप | सड़क सुरक्षा में गंभीर लापरवाही |