Rajasthan News : राजस्थान में त्योहारों और परंपराओं से जुड़ी पतंगबाजी अब खुशी नहीं, खतरे की पहचान बनती जा रही है। जिस पतंग को कभी बच्चों की हंसी और छतों की रौनक माना जाता था, वही आज मौत का कारण बन रही है। जयपुर से लेकर श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा और सिरोही तक बीते एक ही दिन में सामने आई घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
- श्रीगंगानगर: पतंग लूटते वक्त मासूम की मौत, गांव में पसरा मातम
- भीलवाड़ा: पतंगबाजी का विवाद बना जानलेवा, एक की मौत, एक गंभीर
- सिरोही: बाइक सवार युवक का गला कटा, चाइनीज मांझे की फिर पुष्टि
- जयपुर: हालात सबसे भयावह, एक दिन में सैकड़ों घायल, दो मौतें
- चाइनीज मांझा: प्रतिबंध के बावजूद क्यों बिक रहा है?
- सवाल जो हर घर में गूंज रहा है
- अब चुप रहना भी अपराध
प्रतिबंधित चाइनीज मांझा, प्रशासनिक आदेशों और सख्ती के बावजूद, खुले बाजारों में उपलब्ध है और हर गुजरते दिन के साथ आम लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। बच्चे, युवा, बुजुर्ग, राहगीर, बाइक सवार — कोई भी इसकी चपेट से सुरक्षित नहीं है।
आज राजस्थान में जो घटनाएं सामने आई हैं, वे सिर्फ आधिकारिक आंकड़े हैं। असल तस्वीर इससे कहीं ज्यादा भयावह हो सकती है, क्योंकि कई छोटे हादसे या मामूली चोटें रिपोर्ट ही नहीं हो पातीं।
श्रीगंगानगर: पतंग लूटते वक्त मासूम की मौत, गांव में पसरा मातम
श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र के गांव 2 STR में हुई घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया।
8 वर्षीय मासूम नवीन पतंग लूटने के दौरान अपने घर की छत पर चढ़ा था। छत पर चारदीवारी नहीं होने के कारण उसका संतुलन बिगड़ा और वह नीचे गिर गया।
नीचे बनी पानी की डिग्गी में गिरने से नवीन गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे तुरंत घड़साना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
ग्रामीणों की पीड़ा
ग्रामीणों के अनुसार नवीन बेहद चंचल, मिलनसार और होनहार बच्चा था।
एक पल की लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। घटना के बाद गांव में सन्नाटा और शोक का माहौल बना हुआ है।
भीलवाड़ा: पतंगबाजी का विवाद बना जानलेवा, एक की मौत, एक गंभीर
भीलवाड़ा में पतंगबाजी को लेकर हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गया।
दो पक्षों के बीच हुई मारपीट में भोलू नामक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि अख्तर नामक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही सीओ सिटी सज्जन सिंह मौके पर पहुंचे। अस्पताल में भीड़ बढ़ने पर शहर कोतवाल शिवराज गुर्जर और भीमगंज थाना अधिकारी सुनील चौधरी पुलिस बल के साथ पहुंचे और हालात को नियंत्रित किया।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है, लेकिन यह घटना यह साफ दिखाती है कि पतंगबाजी अब सिर्फ हादसों तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक टकराव का कारण भी बन रही है।
सिरोही: बाइक सवार युवक का गला कटा, चाइनीज मांझे की फिर पुष्टि
सिरोही में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का एक और खतरनाक मामला सामने आया।
एक बाइक सवार युवक अचानक सड़क पर फैले मांझे की चपेट में आ गया। तेज धार वाले मांझे से युवक का गला कट गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
उसे तुरंत सरकारी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि प्रशासनिक सख्ती के बावजूद बाजारों में चाइनीज मांझा आसानी से उपलब्ध है।
जयपुर: हालात सबसे भयावह, एक दिन में सैकड़ों घायल, दो मौतें
राजधानी जयपुर में पतंगबाजी और चाइनीज मांझे ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।
एक ही दिन में करीब 150 से अधिक घायल अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराए गए।
जयपुर के अस्पतालों में घायलों का आंकड़ा
| अस्पताल का नाम | घायल मरीज |
|---|---|
| एसएमएस अस्पताल | 41 |
| जयपुरिया अस्पताल | 50 |
| गणगौरी अस्पताल | 31 |
| कांवटिया अस्पताल | 30 |
इन घटनाओं में दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई:
- 10 वर्षीय बच्चे की गर्दन कटने से मौत
- तीसरी मंजिल से गिरने के बाद बबलू बैरवा नामक युवक की मौत
अस्पतालों में पहुंचे ज्यादातर घायलों के गर्दन, चेहरे, नाक और आंखों पर गंभीर कट पाए गए।
चाइनीज मांझा: प्रतिबंध के बावजूद क्यों बिक रहा है?
राजस्थान में चाइनीज मांझे पर पूरी तरह प्रतिबंध है, फिर भी:
- खुलेआम दुकानों पर बिक्री
- ऑनलाइन और चोरी-छिपे सप्लाई
- सस्ती कीमत और ज्यादा धार
इन कारणों से यह आम लोगों तक पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
चाइनीज मांझा:
- बिजली की तारों में फंसकर आग लगाता है
- पक्षियों और जानवरों के लिए घातक
- मानव शरीर के लिए रेजर से ज्यादा तेज
सवाल जो हर घर में गूंज रहा है
- कब तक मासूम बच्चे इस खेल की कीमत जान देकर चुकाएंगे?
- प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक ही क्यों सीमित है?
- क्या प्रशासनिक कार्रवाई केवल हादसे के बाद ही होगी?
आज सामने आई घटनाएं सिर्फ आज की तस्वीर हैं।
हकीकत यह भी हो सकती है कि कई घटनाएं अब तक दर्ज ही नहीं हुई हों।
अब चुप रहना भी अपराध
पतंगबाजी अगर करनी है तो:
- सुरक्षित मांझे का इस्तेमाल
- छतों पर सुरक्षा व्यवस्था
- बच्चों की निगरानी
- अवैध मांझा बेचने वालों की सूचना
यह सिर्फ प्रशासन की नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है।
merarajasthannews यह साफ कहना चाहता है कि
अगर आज भी इस खतरे को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिन और भी ज्यादा दर्दनाक हो सकते हैं।