जोधपुर नाइट टूरिज्म: रात 12:30 बजे तक जगमगाएंगे ऐतिहासिक स्मारक, 5 जनवरी तक पर्यटकों को विशेष छूट

Hemant Singh
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जोधपुर। राजस्थान की सूर्यनगरी जोधपुर अब सिर्फ दिन के उजाले में ही नहीं, बल्कि रात की रौशनी में भी अपनी ऐतिहासिक भव्यता और सांस्कृतिक विरासत का जादू बिखेर रही है। नए साल के मौके पर शुरू किया गया नाइट टूरिज्म प्रयोग शहर के पर्यटन परिदृश्य को एक नई दिशा दे रहा है। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार 5 जनवरी तक जोधपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल रात 12:30 बजे तक खुले रहेंगे, जिससे देशी-विदेशी सैलानियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

रात में भी जीवंत हुई सूर्यनगरी

नाइट टूरिज्म की शुरुआत के बाद जोधपुर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। मेहरानगढ़ किले की तलहटी, घंटाघर, तुरजी का झालरा, और आसपास के ऐतिहासिक बाजार देर रात तक रौनक से भरे हुए हैं। विशेष लाइटिंग, सजे-धजे स्मारक और खुले बाजारों ने शहर को एक उत्सव स्थल में बदल दिया है।

रात के समय स्मारकों की रोशनी में नहाई दीवारें और गूंजता लोक संगीत पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव दे रहा है। कई सैलानी इसे “जोधपुर की नाइट लाइफ का नया अध्याय” बता रहे हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम बने आकर्षण का केंद्र

नाइट टूरिज्म के तहत घंटाघर और तुरजी का झालरा क्षेत्र में रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यहां राजस्थानी लोक संगीत, कालबेलिया और घूमर नृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनें और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही हैं।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि स्थानीय कला और संस्कृति को वैश्विक मंच देना भी है। विदेशी पर्यटक खासतौर पर इन लोक प्रस्तुतियों में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

प्रशासनिक तैयारी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

नाइट टूरिज्म की सफलता के पीछे प्रशासनिक तालमेल और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के मार्गदर्शन में इस योजना को धरातल पर उतारा गया है। वहीं, केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रयासों से जोधपुर को नाइट टूरिज्म के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाया गया।

पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश की निगरानी में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। प्रमुख चौराहों, स्मारकों और बाजार क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी निगरानी, गश्त और ट्रैफिक प्रबंधन से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देर रात घूमने वाले सैलानी खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करें।

व्यापार और रोजगार को मिला नया जीवन

नाइट टूरिज्म का सीधा फायदा जोधपुर के स्थानीय व्यापार और रोजगार पर पड़ा है। होटल, कैफे, रेस्टोरेंट, टैक्सी सेवाएं, गाइड और हस्तशिल्प बाजारों में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, कारोबार में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।

हस्तशिल्प विक्रेताओं का कहना है कि रात में पर्यटकों की संख्या बढ़ने से उनकी बिक्री में अच्छा इजाफा हुआ है। वहीं, युवाओं को गाइड, इवेंट मैनेजमेंट, सुरक्षा और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नए रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

पर्यटकों में दिखा खास उत्साह

देश-विदेश से आए पर्यटक जोधपुर के इस नए रूप से बेहद प्रभावित नजर आ रहे हैं। कई सैलानियों का कहना है कि रात में स्मारकों को देखने का अनुभव दिन की तुलना में कहीं ज्यादा रोमांचक और यादगार है। खासतौर पर फोटोग्राफी और सोशल मीडिया के शौकीनों के लिए यह नाइट टूरिज्म किसी वरदान से कम नहीं है।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रयोग इसी तरह सफल रहा, तो आने वाले समय में जोधपुर भारत के प्रमुख नाइट टूरिज्म डेस्टिनेशन्स में शुमार हो सकता है।

भविष्य की राह

नाइट टूरिज्म की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि जोधपुर अब सिर्फ एक “डे-टूरिज्म सिटी” नहीं रहा। प्रशासन और पर्यटन विभाग इस मॉडल को स्थायी रूप देने पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि सालभर पर्यटकों को रात में भी स्मारक भ्रमण का अवसर मिल सके।

अगर यह योजना आगे भी जारी रहती है, तो जोधपुर न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में नाइट टूरिज्म का रोल मॉडल बन सकता है—जहां इतिहास, संस्कृति और आधुनिक पर्यटन एक साथ चमकते नजर आएंगे।

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